उत्तर
मनोज सिन्हा ने कहा, ‘कश्मीर सूफीवाद और सांप्रदायिक संप्रदाय की भूमि है।’
‘पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिली है।’
‘जम्मू कश्मीर एक पवित्र भूमि है जहां विभिन्न धर्म और संस्कृतियां फली-फूली हैं।’
ग़ैर: जम्मू कश्मीर (जम्मू कश्मीर) के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (मनोज सिन्हा) ने शनिवार को कहा कि मध्य प्रदेश में पुराने पुराने दिन लौट आए हैं और हिंसा और उग्रवाद का युग समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा, ‘अब यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि शांति और समृद्धि हमेशा बनी रहे।’
सिन्हा ने यहां ‘इंडियन माइनॉरिटी फाउंडेशन’ द्वारा ‘सूफीवाद और कश्मीरियत: शांति और भाईचारे का एक उदाहरण’ विषय पर आयोजित सामुदायिक सम्मेलन में कहा, ‘कश्मीर सूफीवाद और सांप्रदायिक सद्भावना की भूमि रही है, जहां से दोस्ती और भाईचारे की भावना फलती है- फूलती रही है. कश्मीर की सह-अस्तित्व की विरासत भी सदियों पुरानी है, लेकिन पिछले कुछ दशकों में यह उथल-पुथल से भरा हुआ हो गया है। लेकिन, अब कश्मीर बदल रहा है।’
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सम्मेलन में विद्वान, शिक्षाविद, छात्र, भोज, व्यापार और पर्यटन संघ, किसान संघ और विभिन्न गैर सरकारी छात्रों के मठाधीशों ने भी भाग लिया। सिन्हा ने कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान घाटी में विकास की नई राहें खुली हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व से जम्मू-कश्मीर के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिली है।
उपराज्यपाल ने कहा कि कश्मीर में हाल के वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा, ‘जम्मू कश्मीर एक पवित्र भूमि है जहां विभिन्न धर्म और संस्कृतियां फली-फूली हैं। लेकिन दुर्भाग्य से पिछले तीन दशकों में यह भूमि हिंसा और आतंकवादियों से पीड़ित रही है, जिसमें हमारे पड़ोसी देश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।’

सिन्हा ने कहा, ‘उसने (पाकिस्तान) घाटी में शांति भंग करने की कोशिश की।’ हालांकि, जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के योगदान से अब कश्मीर में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि कोई भी क्षेत्र शांति के बिना विकसित और समृद्ध नहीं हो सकता।
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टैग: जम्मू कश्मीर, एलजी मनोज सिन्हा
पहले प्रकाशित : 29 अक्टूबर, 2023, 07:21 IST
