रामकुमार नायक/रायपुर. छत्तीसगढ़ में महिलाएं रोज एक नया आयाम रच रही हैं। पूरे रायपुर जिले के नीलगिरि में ओटगन गांव का गौठान, खस, मंथा, लेमनग्रास के तेल का स्थानीय उत्पादक बन गया है। ओटगन गांव के गौठान में लगी ज्वालामुखी यूनिट से ये होता है काम. कामधेनु महिला स्व- सहायता समूह के सदस्यों ने इस इकाई से अब तक 60 लीटर से अधिक तेल का उत्पादन भी लिया जाता है। रायपुर के स्थानीय बाजार में इस औषधीय औषधीय तेल को बेंचकर समूह की महिलाओं के खाते में लाखों रुपये से अधिक का फायदा हुआ है।
स्थानीय औद्योगीकरण से आय बढ़ाने के लिए स्थापित इस ओटगनथान को अब औषधीय और शैक्षणिक संस्थान के गोदाम के रूप में विकसित किया जा रहा है। ओटगन गांव की सरपंच संजीता और संजय की कहानियां, कि गांव के गौठान में पेट्रोलियम कंपनी लिमिटेड द्वारा संचालित तेल की यूनिट लगाने से महिलाओं में बड़ा उत्साह है। अभी छोटे पैमाने पर इस इकाई से नीलगिरी, खस, मंथा, और कुछ लेमनग्रास की खरीद हुई है। आगे बताया कि अब तक लगभग 60 किलोवाट तेल का उत्पादन किया जा रहा है। जिसे स्थानीय बाजार में लगभग आठ सौ आलू के भाव से बेंचकर समूह की महिलाओं को लगभग मिलता है 1 लाख 50 हज़ार रुपये का फ़ायदा हो चुका है.
खेती से अच्छी हो रही कमाई
इस गौठान से जुड़ी समूह की महिलाओं की औसत मासिक आय लगभग साढ़े पांच हजार रुपये हो रही है। महिला बेरोजगार की औसत मासिक आय से साढ़े सात हजार रुपये तक की वृद्धि की योजना है। इसके लिए फार्मास्युटिकल और औषध विज्ञान के सुदृढ़ीकरण के लिए अमल पर अमल शुरू हो गया है। गौठान के पास ढाँचे-डेढ़ किनारे रकबे में खास और लेमनग्रास की खेती की जा रही है, साथ ही पांच नक्षत्र में मंथा भी लिखा है। बटालियन इकाई की क्षमता के अनुसार उपलब्ध सामग्री के लिए तिल्दा विकासखंड के दसियों और गौठानों में लगभग उपलब्ध है 17 ओक रकबे में औषधीय और फार्मास्युटिकल की खेती की जाएगी।
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पहले प्रकाशित : 3 नवंबर, 2023, 14:58 IST
