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प्रदूषण में हर साल टॉप पर रहता है ये जंगल, आलोच्य-गाजियाबाद में रहने वालों की घुट्टी है पृथ्वी, ऐसे करें आरक्षण


सबसे प्रदूषित दिल्ली के हैं: फिलोफ़िन में प्रदूषण अपनी सीमा से आगे बढ़ गया है। यहां की हवा में जहर भरा हुआ है। एशिया के कई देशों में एयर वैलिडिटी इतनी खराब हो गई है कि लोगों के पास भी स्मारक का जादू का चक्र दिखाई देने लगा है और लोगों को भी सांस लेने में दिक्कत हो रही है। उत्तर इलाक़ा में एक्यूआई 500 का इलाक़ा के करीब पहुंच चुका है. हालाँकि फ़िलाफ़ के कई इलाक़े ऐसे हैं जहाँ इस बार हर साल प्रदूषण की मार सबसे ज़्यादा नहीं होती। इन पुरातत्वविदों में से एक है यहां अवशेष मॉग और प्रदूषण की धरती से दिन में भी अंधेरा ही रहता है।

फ़्लोरिडा के सबसे समुंदर के किनारे स्थित आनंद विहार में से एक है। इस बार यहां दो दिन पहले ही एयर रियल्टी इंडिया की सबसे लंबी दूरी 999 तक पहुंच गई है। आनंद विहार के फ़्लोरिडा का फ़्लोरिडा और ग़ाज़ियाबाद में रहने वाले लोगों में से एक है।

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सेंटर फॉर साइंसेज एंड एनवायरनमेंट की पॉल्यूशन कंट्रोल यूनिट में एसोसिएट एक पार्ट विवेक चट्टोपाध्याय का कहना है कि आनंद विहार में इतना प्रदूषण है कि यह गैस चैंबर बन गया है। यहां रहने से लेकर सांस लेने वाले और सांस लेने वाले लोगों को भी सांस लेने में दिक्कत हो रही है। 999 एक्यूआई में रहना काफी बुरा है।

आनंद विहार में घटित होती है इतनी मोटी परत
विवेक चट्टोपाध्याय का कहना है कि हर साल आनंद विहार में एयर ट्रैकवैलिटी इतनी खराब होती है, इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं। वैसे तो पूरी तरह से फ्रीलांस में ही प्रदूषण है लेकिन कुछ स्थानीय मुद्दे हैं जिसके कारण यहां स्थितियां खराब होती हैं। पहला बड़ा कारण यह है कि आनंद विहार बस अड्डे में कई बीएस 3 और बीएस 4 वाले डीजल मॉडल मौजूद हैं। जब फिलीपॉन में पर्यावरण की स्थिति का संकेत मिलता है तो ऐसे में पेट्रोलियम उत्पादों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों को कई गुना बढ़ाए गए उत्पाद मिलते हैं।

वहीं दूसरी बड़ी वजह है माउंटेन लैंड फिल साइट। यहां साल में कई बार क्रीडा के जंगलों में आग लगती रहती है। इससे संबंधित अवैध खनन उद्योग और ज्वालामुखी जमा स्थित हैं। हलकी झील शुरू होती है और फूल में प्रदूषण की परत चढ़ती है, ये गांस यहां की हवा को और सचिवालय बनाने का काम करती है।

इन जंगलों में रहना मुश्किल है
विवेक का कहना है कि आनंद विहार के पास साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र भी है जो यहां प्रदूषण को पुनः प्राप्त करता है। हालाँकि इस सब की वजह से आनंद विहार के आसपास के पूर्वी हिस्से में स्थितियाँ बहुत खराब हो गई हैं। ऐसे में सता ट्रांस हिंडन के विशाल क्षेत्र में कौशांबी, वैशाली, वसुन्धरा, साहिबाबाद, इंदिरापुरम आदि स्थान शामिल हैं और इलाक़ों में सूर्य नगर, विवेक विहार, कड़कड़डूमा, पटपड़गंज आदि में 2.5 की मात्रा बनी हुई है। यहां सांस लेने में दीक्षांतों के अलावा लोगों के अस्पताल में भर्ती होने तक की स्थिति पैदा हो जाती है।

ऐसा करें डिज़ाइन
विवेक कहते हैं कि भीषण प्रदूषण में खतरे से खाली नहीं है। आनंद विहार के आसपास रह रहे लोगों को कोशिश करनी चाहिए कि वे कम से कम एक महीने के लिए इस इलाके को कहीं और घूमने जाएं। इसके अलावा स्थानीय निकायों और सरकार को भी इस क्षेत्र के लिए हेल्थ एड एड जारीरी जारी करनी चाहिए।

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टैग: वायु प्रदूषण, आनंद विहार, दिल्ली समाचार, दिल्ली प्रदूषण



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