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तुलाने-हकलाने वालों के लिए रामबाण है ये पौधा, 6 महीने में दूर होगी परेशानी, बस रोज करना होगा ये काम


कमल पिमोली/गर्लवाल। हिमालय औषधीय जड़ी-बूटी का भंडार है। यहां ऐसे कई स्वास्थ्यवर्धक जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं जो सेहत के लिए फायदेमंद साबित होती हैं। ऐसा ही एक औषधीय पौधा है. सामान्य हरे घास की तरह दिखने वाला यह पौधा कई असाध्य दवाओं में रामबाण का इलाज है। इसका प्रयोग घरेलू नुस्खों के साथ-साथ दवा बनाने में भी किया जाता है। वच यूरोपीय मूल का पौधा है. लेकिन मध्य हिमालयी क्षेत्र में भी यह पाया जाता है। पुराने समय से ही इसका प्रयोग लोग विभिन्न प्रयासों में करते थे। औषधीय पौधे होने का कारण वनस्पति से इस औषधि की बड़ी मात्रा में दोहन होता है, जिसका कारण यह है कि आज यह एक रेयर प्लांट है।

उत्तराखंड की गढ़वाली यूनिवर्सिटी की रिसर्च स्कॉलर पल्लवी सती बताती हैं कि वच के उपचार के कई फायदे हैं। इसके मुख्य रूप से 6 पौधे हैं, जिनमें अपना-अपना औषधीय लाभ है। इसके शिष्यों से लेकर पूर्वजों तक का सभी का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने आगे दी गई जानकारी में कहा गया है कि हकलाने और तुलाने की समस्या को ठीक करने के लिए भी काफी क्रांतिकारी प्रगति होती है। प्रतिदिन वच के अंतिम दिन का 1 ग्राम का टुकड़ा सुबह-शाम चबाना चाहिए। यदि लगातार 6 महीने तक इसका उपयोग किया गया, तो लाभ देखने को मिलता है। वह बताते हैं कि बीटा एसआर, रियो मेटाबोलाइट, और राइज़ोम ये उपाय उपलब्ध रहते हैं।

कई दुकानदारों का रामबाण इलाज
घर पर काम कर रहे प्रो. विजय कांत के पुरोहितों का कहना है कि वाच का प्रयोग डायनासोर जैसी बीमारी में भी किया जाता है। अगर दांतों से दूध बनाया जाए तो यह गले के रोग के लिए भी है। वाच बच्चों की खांसी, दमा से भी रात को अंधेरे में अपहरण होता है। इसके लिए अन्य औषधियों के साथ इसका प्रयोग करना चाहिए। यह भूख बढ़ाने में भी मदद करता है।

दोहन ​​बनाने का कारण
प्रो. शिष्य आधुनिकता के विविध दौरों के साथ कई औषधीय पादपों की अंतिम सीमा तक पहुँच चुके हैं। आम लोगों को इन अधिकृत की जानकारी नहीं मिल रही है और बाजार में खाद्य पदार्थों के निर्माण में यह दोहन तो हो रहा है। लेकिन इसे नकली के रूप में देखते हुए कोई भी बेकार काश्तकारी नहीं करना चाह रहा था। यदि कोई व्यावसायिक खेती करता है, तो आर्थिक रूप से लाभ कमाया जा सकता है क्योंकि इसके केक बनाने से लेकर अन्य अवशेषों की काफी मांग रहती है।

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