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धनतेरस के दिन धन्वंतरि की क्यों की जाती है पूजा, इस दिन 13 को दीपक जलाना माना जाता है शुभ, ज्योतिष से जानें


रामकुमार नायक/रायपुरः सनातन धर्म में दीपावली का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है। दीपावली का त्यौहार बड़े पैमाने पर धूम-धाम से मनाया जाता है, जो पांच दिनों तक मनाया जाता है। इस पर्व की शुरुआत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी अर्थात धनतेरस के दिन से होती है। सिद्धांत यह है कि इस दिन समुद्र तट पर भगवान धनवंतरी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। ऐसे में इस दिन भगवान धन्वंतरि देवता के साथ धन संपदा के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। आइए आज हम आपको छत्तीसगढ़ के ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला से जानते हैं कि धनतेरस के दिन की पूजा कैसे करें और कैसे दीये जलाएं।

ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि धनतेरस त्रयोदशी तिथि को किस दिन मनाया जाता है। वैज्ञानिक ऋषि मुनियों ने हमारे शरीर का पहला धन माना है। कहा जाता है, कि पहला सुख निरोगी काया. धनतेरस का दिन सबसे महत्वपूर्ण है. अपने शरीर के स्वास्थ्य को सुखी बनाने के लिए आयुर्वेद के मूलमंत्र भगवान धन्वंतरि की पूजा करें। भगवान धनवंतरि इसी दिन प्रकट हुए थे। धनरिवंत जी समुद्र तट से अमृत को लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए धनतेरस के दिन धनवंतरी जी का अवतरण उत्सव मनाया जाता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि शरीर को सुखी रखना, यही पतला धन है। अगर मरीज़ गया तो कोई दूसरी चीज़ पसंद नहीं आएगी। संग्रहीत की समान सुगंध में अमृत के औषधि तत्व पाए जाते हैं। इसलिए इन दिनों भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। धनतेरस के दिन शयनकाल का 13 दिन बाद विमोचन होना चाहिए।

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