ओपीपी/सोपानकोरबा. मूल त्योहारों की धूम मची हुई है। दीपावली को भी अब कुछ ही दिन बचे हुए हैं। दीपावली के दो दिन पूर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी इस बार 10 नवंबर को धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा। धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। आपको बता दें कि इस दिन धर्मराज यम देवता की पूजा की जाती है। इस दिन यम देवता की पूजा करने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। इस विषय को लेकर आए हैं हम ज्योतिषाचार्य पंडित मेरठ स्टूडियो से बातचीत की।
पंडित आयुर्वेदिक बाबा ने बताया कि धनतेरस के शाम धर्मराज यम देवता और यमराज की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन यम देवता को दीपदान करने से परिवार के लोगों की अकाल मृत्यु नहीं होती है। धनतेरस के दिन शाम के वक्त घर के प्रमुख दरवाजे के बाहर मिट्टी का एक दिया यम देवता के लिए जलाएं। चावल के ऊपर दीपक रख यम देवता से प्रार्थना करें। ऐसा करने से परिवार में आने वाली अकाल मृत्यु का कारण बनता है।
दीपदान करने से समाप्त हो जाएगा मृत्यु भय
ज्योति आचार्य ने बताया कि इसके पीछे एक धार्मिक कहानी है। यम दूतों से यमराज ने पूछा कि जब तुम किसी व्यक्ति की आत्मा को ले जाओ, तब क्या कंधे का दर्द नहीं होता। तब यमदूतों ने उत्तर दिया कि किसी राक्षसी की अकाल मृत्यु के दौरान उसकी आत्मा और उसके परिवार की रुत सुन उनका दिल बहुत दुःखी होता है। तब यमदूतों ने स्वयं यमराज से पूछा आखिर क्या है ऐसा कोई उपाय. जिससे किसी व्यक्ति की असमय काल मृत्यु ना हो। फिर यमराज ने उन्हें उपाय बताया कि धनतेरस के दिन जो विधि विधान से दीपदान किया जाता है, उसके मन से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है और उन्हें अकाल मृत्यु नहीं मिलती है।
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पहले प्रकाशित : 6 नवंबर, 2023, 16:08 IST
