मनीषपुरी/भरतपुर: दीपावली आने ही के लिए जून 2019 में होटल में सबसे पहले दिवाली और चहल पहल दिखाई दी। और मिठाइयों की मूर्तियां पर भरे हुए हैं। तो वहीं दूसरी ओर जूनून में मिल रहे हैं देसी कलाकंद की डिजाईन सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है।
जूनानू में देसी कलाकंद को लोग काफी पसंद करते हैं। इसलिए यह कलाकंद सबसे अधिक बिक्री एवं डिजायनर में रहता है। विशेषकर दीपावली पर यह कलाकंद की मांग अधिक रहती है। लोग दीपावली के त्यौहार पर इस कन्द को काफी पसंद करते हैं। अपने घर के लिए लेकर जाते हैं। ज्यादातर मिठाईयों पर यह देसी कलाकंद ही काफी पसंद किया जाता है।
320 रुपये किलो का रेट है
जून में इस कलाकंद की कीमत ₹320 रुपये किलो है। जो कि एवं शुद्ध स्वच्छ तरीकों से बनाया जाता है। छात्र-छात्राएँ हैं।की दीपावली पर अधिकांश ग्रामीण लोग एक जैसे कलाकंद को पसंद करते हैं।और अपने घर के लिए लेकर जाते हैं। इस कलाकंद की डिजाईन इतनी ही है कि यह जूनून के अलावा आसपास के क्षेत्र में भी अन्य सजावटी वस्तुओं में भी जाती है और दूर-दूर के लोग भी इसे काफी पसंद करते हैं। जयपुर दिल्ली मुंबई में भी इसकी काफी संख्या में डिजायनर रहते हैं।
जूनून में है इसका सबसे अधिक डिजायट
अब दीपावली पर ही लोग अपने घर के लिए मिठाई के तौर पर ज्यादातर एक जैसे कलाकंद को तोड़ते हैं। जूनागढ़ के रेस्तरां में मिठाईयों की खातिरदारी में भारी भीड़ उमड़ रही है। लोग इस कलाकंद को बहुत ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इसलिए इसका जूनून में सबसे बड़ा बाज़ार है।
यह कलाकंद दूध का मावा और चीनी चाशनी का मावा दोनों को मिलाकर तैयार किया जाता है. और इसे 7 से 8 घंटे के लिए एक सुरक्षित स्थान पर रखें।
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पहले प्रकाशित : 12 नवंबर, 2023, 09:22 IST
