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रसगुल्ला-पेड़ा नहीं… इस मिठाई को देखते ही बचपन की याद आएगी ताज़ा, पर टूटे हुए टुकड़े हैं बच्चे


आकाश कुमार/जमशेदपुर. काजू कतली, बेसन के लोध या फिर गुलाब जामिन यह वह मीठा है जो अक्सर लोग खाते हैं। लेकिन हमारी जेहन में एक हाथी का नाम आता है, वह है हाथी हाथी। यह विशेष रूप से छोटे बच्चों के बीच सबसे खास है। आते ही बाजार में यह रंग बिरंगी हाथी घोड़े का साज है।आज भी यह क्रेज कम नहीं हुआ है।

लोकल 18 को बताया गया है कि यह मिठाई कई क्रिसमस के दिन लोगों की पहचान है और इसे बनाने की प्रक्रिया काफी सरल है। के बाद इसे एक बड़ा दर्जा दिया जाता है। आपको हाथी, घोड़ा, मोर, दिया, हंस, बथक, मछली जैसे और भी डिजाइन के घटिया मिल जाएंगे। जिसकी कीमत महज 160 रुपये प्रति किलो है।

बच्चों का है फ़ेवरेट
इसके अलावा आपको बताओशा, खोई, इलायची जैसी सामग्री भी बच्चों को बहुत पसंद आती है और वे लोग घर में और मिट्टी के बने खिलौने घर में बनाकर खेलते हैं। छूटे हुए लोग, यह परम्परा से चली आ रही है कि के दिन बच्चे हाथी घोड़े को मिठाई में भरते हैं। फिर पूजा के बाद इसे प्रसाद के रूप में बुलाया जाता है। वैसे तो यह दिखने में सामान्य आदर्श हो, लेकिन दिवाली पूजा में इसका विशेष महत्व होता है।
यदि आपके भी घर में बच्चे हैं तो आप साकची बाजार में साकची बाजार में जाकर सारा सामान खरीद सकते हैं। खास तौर पर यह तीन रंगों से बना होता है गुलाबी, पीला और सफेद रंग से बना होता है।

टैग: दिवाली, स्थानीय18



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