व्रतियों के लिए छठ श्रद्धा के साथ जाने वाला एक कठिन व्रत है। महिलाएं और कहीं-कहीं पुरुष भी इस मौके पर चौबीस घंटे बिना अन्न-जल के व्रत लेकर भगवान भास्कर का पूजन करते हैं। लेकिन अन्य लोगों का आकर्षण आकर्षक-मीथे थेकथों का होता है। अब तो दिल्ली- ब्रह्माण्ड के ज्यादातर लोग इन ठेकुओं के मठों को चख चुके हैं। ऐसे लोगों के लिए अब लाजिमी हो गया है कि वे छठ के प्रसाद के लिए अपने सहयोगियों पर छठ के प्रसाद के लिए ठेकुए ले जाएं। वैसे और भी बनाए गए हैं लेकिन ये थेकुए हर किसी के लिए रुचिकर हैं।
उमदा स्वाद वाले इन ठेकुओं को खाने में जो आनंद आता है, उसे लगता है कि यह बनाना कॉम्प्लेक्स है। लेकिन ये इतना कठिन नहीं है. बड़ी ही सहजता से इसे बनाया जा सकता है। तो बहुत ही आसान तरीकों से जान लीजिए कि ठेकुआ कैसे बनाया जा सकता है.
ठेकुआ के सामान के लिए
आम तौर पर ठेकुआ के टुकड़ों से ही बनाया जाता है। छठ के कुछ व्रत तो इसके लिए राजस्थान में हाथ वाली रोटी से अलग-अलग आटे का आटा बनाया जाता है. लेकिन जो अपने हाथों से इसे पीसता नहीं है वह भी अलग से आटा खरीद कर उसकी पवित्रता का हिस्सा है। आपको ऐसे ही बनाना है तो साधारण आटा ले लें। अगर मल्टीग्रेन भी ले तो कोई फर्क नहीं पड़ता. आटे को अच्छा कर रख लें. चीनी या गुड़ का जो मिश्रण के लिए उसका उपयोग किया जा सकता है। गुड़ का ठेकुआ लोगों को बहुत पसंद आ रहा है, उसी के बारे में चर्चा करते हैं.
गुड़ या चीनी जो रुचे
गुड़ को पानी में डाल कर उसे गला लें। मात्रा अपनी रुचि से आप तय करते हैं। चॉकलेट गुड़ डालेंगे ही मीठा होगा ठेकुआ। गुड के अच्छे तरह के गल जाने के बाद इसे गुड लें और ठंडा कर लें. अब एस्टे में देसी घी का ढांचा उसे अच्छी तरह मिला लें। इधर गुड़ का पानी जब इतना ठंडा हो जाए कि हाथ न जले तो उसी से दांत को छूना है। इसमें खास बात एट की मडई की है. आटा मोटे तौर पर अच्छे तरीकों से दबा–दबा कर सना होगा, ठेकुए इकाई ही सामान्य।
फ्लेवर्ड भी बना सकते हैं
फ्लेवर्ड ठेकुआ भी बनाया जा सकता है. इसके लिए अपनी रुचि के अनुसार दस्तावेजों में इलायची पाउडर, नारियल का बुरादा, दालचीनी का पाउडर या फिर प्रभाव वेनिला एसेंस, केवड़ा या फिर गुलाब जल दाल शामिल हो सकते हैं। अगर इसमें से कोई सामान की कमी हो तो उसे सनाने से पहले आटे में मिला लिया जाएगा। वैसे छठ वाले ठेकुए जब बनाए जाते हैं तो इसमें श्रद्धा के अलावा कोई फ्लेवर शामिल नहीं होता है। परंपरागत रूप से इसे बेलने के बाद लड़की के सांचों पर कुछ निशान बनाने के लिए जाया जाता है। अधिकतर ये निशान सूर्य की चोटी पर होते हैं और शेष इसे भगवान भास्कर के प्रसाद के तौर पर ग्रहण करते हैं।
बूँदें- भूरे ठेकुए और आहा…।
अब कड़ाही में घी गरम कर लें. घी की जगह अपनी रुचि का कोई तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन घी इसका मजा बढ़ाता है। एक बार घी के भारी तापमान पर गरम हो जाने पर ठेकुआ मठाधीश मधिम कर दे। अगर आँच तेज रहेगी तो ऊपर से ठेकुए जल जायेंगे और अंदर से कच्चा रह जायेंगे। इनका रंग भूरा होना चाहिए। ध्यान का ध्यान अच्छे से रखना होता है. गरमागरम ठेकुए तैयार हैं, लेकिन इनके खाने का मजा थोड़ा ठंडा हो जाने पर आता है. घी और मक्खन इसका प्रिजर्वेटिव का काम करते हैं। सस्ते बड़े आराम से आप इसका इस्तेमाल कई दिनों तक कर सकते हैं। फ़्रांसीसी लटपटी आलू गोभी की सब्जी या अचार के साथ इसका जायका और बढ़ जाता है। खासतौर पर मिठाई खाने वालों को भी ये बहुत पसंद हैं।
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पहले प्रकाशित : 17 नवंबर, 2023, 12:15 IST
