ओप/सैपकोरबा: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी मनाई जाती है, जिसके अनुसार छत्तीसगढ़ में चतुर्थ नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। अक्षय नवमी पर किए गए कार्य से व्यक्ति को अक्षय फल की प्राप्ति होती है। इस पर्व के महत्व और साईं का सही सूत्र जानने के लिए हमने ज्योतिष पंडित दिसंबर डोना से बातचीत की।
पंडित दशरथ नंदा डेंटल ने बताया कि अक्षय का अर्थ अमर है, अर्थात जिसका कभी क्षय नहीं होता है। इस दिन को सभी प्रकार के दान-पुण्य कार्यों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि से लेकर पूर्णिमा के दिन तक भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी आंवले के वृक्ष पर निवास करते हैं। इसी कारण अक्षय नवमी पर आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। पंडित दशरथ नंदा विधि ने आगे बताया कि इस दिन विधान से व्रत कर आंवले के पेड़ के नीचे किसी ब्राह्मण को भोजन कराने से हजारों गुना फल मिलता है। वहीं जो व्यक्ति स्वयं इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे भोजन ग्रहण करता है तो उसे स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
अक्षय नवमी शुभ मुहूर्त
कार्तिक नवमी के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 21 नवंबर, 2023 को प्रातः 03 बजे 16 मिनट पर स्टारकास्ट हो रही है और इसका समापन 22 नवंबर को रात्रि 01 बजे 09 मिनट पर होगा। इसलिए, अक्षय नवमी 21 नवंबर, मंगलवार का दिन मनाया जाएगा।
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पहले प्रकाशित : 18 नवंबर, 2023, 20:57 IST
