उत्तर
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की विशेष अदालतों को अहम आदेश दिया।
वैज्ञानिक-विधायकों के आपराधिक सहयोगियों के अपरिहार्य निर्देश.
इलाहबाद हाई कोर्ट ने रेकेट जनरल को विशेष रूप से निर्देशित किया।
ट्रायल रोक वाले केसोन को सुनवाई के लिए अदालतों में पेशी का आदेश दिया गया।
अंत. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में प्रदेश के सभी एमपी, राजनीतिक विशेष अदालतों को फांसी, पांच वर्ष से अधिक की सजा वाले आपराधिक मामलों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द तय करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि उच्च न्यायालय या सत्रह अदालत से सुनवाई रोकी गई है तो माहवारी रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया जाएगा। उच्च न्यायालय ने रिजेक्ट जनरल को ऐसे मामले में रोक लगा दी है, जिसमें सुनवाई के लिए सूची बनाने का निर्देश दिया गया है, ताकि सुनवाई कर रोक को हटाया जा सके। साथ ही मजिस्ट्रेट की विशेष अदालत के खिलाफ आदेश के यदि सत्रह अदालत में अपील या पुनरीक्षण याचिका है तो जल्द सुनवाई कर तय करने का भी निर्देश दिया गया है।
उच्च न्यायालय ने जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के लिए सभी एमपी, राजसी विशेष न्यायालयों के लिए सहायक के रूप में सामान्य तकनीकी योग्यता की नियुक्ति का भी आदेश दिया है। उच्च न्यायालय ने कहा है कि यदि उच्च न्यायालय को मोनार्क की आवश्यकता हो तो सूचित किया जाए, जिसका समाधान सुरक्षित रूप से किया जाए। कोर्ट ने महाधिवक्ता व लिपिका से इसमें सहयोग मांगा है और 4 जनवरी 24 को याचिका दायर करने का आदेश दिया है। यह आदेश प्रमुख कार्यकारी जस्टिस एमके गुप्ता और जस्टिस समित गोपाल की डिवीजन बेंच ने दिया है।
9 नवंबर 2023 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अश्विनी उपाध्याय केस की सर्वोच्च अदालत में आदेश के क्रम में नीचे दिए गए आदेश में कहा: क्रमिक सूची की सुनवाई करने का यह आदेश दिया गया है। निचली अदालतों की सुनवाई के लिए इस याचिका के माध्यम से मुख्य धारा के खिलाफ विचार। अदालत को बताया गया कि इसी मामले में पहले ही एक खोज पत्र पर विचार किया गया था, जिसमें समय-समय पर निर्देश जारी किए गए थे। दोनों आवेदन पत्रों की अब एक साथ सुनवाई होगी।
प्रदेश में सत्रह अदालतें व मजिस्ट्रेट स्तर की अलग-अलग विशेष अदालतें पैमाने के सामान की सुनवाई कर रही हैं। उन्होंने हर माह प्रोग्रेसिव रिपोर्ट कोर्ट को भेजी है, जिसमें उन केसों का जिक्र भी शामिल है, जिनकी वजह से ट्रायल रुका हुआ है। उच्च न्यायालय ने मृत्युदंड, पांच साल से अधिक की उम्रकैद की सजा के आपराधिक मामलों पर सुनवाई में सुनवाई का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने कहा कि अपराचल के अलावा शेष असाध्य रूप में परिवर्तन न किया जाए। कोर्ट ने वेबसाइट पर जानकारी अपडेट करते हुए रहने का भी आदेश दिया है।
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पहले प्रकाशित : 25 नवंबर, 2023, 18:00 IST
