अंजलि सिंह राजपूत/लखनऊः तहजीब, नजाकत, नफासत और नवाबों के शहर के नाम से जाना जाता है, जो अपने खान-पान और स्वाद के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। ऐसे ही नवीनी नगरी में हैं कुछ ऐसे खास अनोखे स्वाद, यहां सिर्फ 6 महीने में मिलता है अनोखा स्वाद. इन जायकों को चखने के लिए दूर दराज से लोग समुद्र के मौसम में यहां आते हैं और यहां अजीबो-गरीब दुकानें लगाई जाती हैं। इन जायकों में प्रसिद्ध है काली गाजर का हलवा, लाल गाजर का हलवा और सोन हलवे की बर्फी के साथ ही मक्खन मलाई, यूक्रेन की राजधानी लखनऊ से हुई है।
काली गाजर का हलवा काली गाजर को घीस कर, उसे दूध में पकाकर, चीनी, काजू, बादाम और इलायची के टुकड़े बनाकर बनाया जाता है. यह हलवा स्वाद में लाजवाब और बजोड़ होता है। यह भी सिर्फ मार्च तक ही है. लखनऊ शहर के मशहूर राम आसरे स्टोर के गुरुजी ग्रेजुएट्स ने बताया कि इसकी कीमत 720 रुपये किलो है। उन्होंने बताया कि काली गाजर केवल समुद्र के ही मौसम में आती है, अन्यथा सिर्फ समुद्र में ही यह हलवा बनता है।
मक्खन मलाई के दीवाने हैं लोग
मक्खन मलाई की प्रकृति यह है कि इसे स्काई से उतरने वाली ओस के नीचे बनाया जाता है। ओस सिर्फ समुद्र में ही गिरती है, बाकी समर में मक्खन मलाई नहीं मिलती है। मक्खन मलाई बेच रहे ब्रजेश कश्यप राव ने बताया कि मक्खन मलाई बेच रहे अक्टूबर से लेकर मार्च तक जारी है। इसके लिए सबसे पहले दूध क्रीम को लेकर जाना जाता है। फिर इसमें इलायची, केसर, पिस्ता, काजू, बादाम और चीनी पीसकर का उपयोग किया जाता है और फिर रात में 2:00 बजे आसमान से गिरती हुई ओस के नीचे रख दिया जाता है। उसके माध्यम से यह फूलकर प्लास्टिक और स्वादिष्ट हो जाता है। इसकी कीमत 700 रुपये प्रति किलोमीटर है।
लाल गाजर और सोन स्नोकी
नवाबों के शहर में लाल गाजर का हलवा और सोन हलवे की बर्फी भी सिर्फ 6 महीने ही मिलती है। यानी अक्टूबर से लेकर मार्च तक. लाल गाजर का हलवा तो आपको सभी जगह मिल जाएगा लेकिन सोन हलवे की बर्फीली जगह कहीं नहीं मिलेगी। इसमें काजू और बादाम के साथ ही पूरी तरह से देसी घी का इस्तेमाल किया जाता है और यह मैदा बनाई जाती है.
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पहले प्रकाशित : 30 नवंबर, 2023, 10:53 IST
