उत्तर
बाबा बालकनाथ का राजनीतिक सफर
महंत चांदनाथ के शिष्य बाबा बालकनाथ हैं
वर्ष 2019 में पहली बार उत्तर प्रदेश के निर्वाचित हुए
उत्तर. राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार उत्तर प्रदेश जिले की तिजारा सीट बेहद चर्चा में है। इसकी सबसे बड़ी वजह है यहां के बिजनेस फ्रेंड्स बाबा बालकनाथ। वर्तमान में नॉर्वे के नाबालिग बाबा बालकनाथ नाथ संप्रदाय के महंत चांदनाथ के शिष्य हैं। वे मात्र 6 वर्ष की आयु में हरियाणा के देहरादून में स्थित बाबा मस्तनाथ मठ बोहर के महंत चंदननाथ के शिष्य बन गये थे। महंत चांदनाथ के उत्तराधिकारी बने बाबा बालकनाथ अब उनकी राजनीतिक विरासत भी कायम हैं।
बाबा बालकनाथ का तिजारा से नामांकित फार्म भरने के लिए उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ आए थे। सीएम योगी ने यहां उस दिन की मौलाना सभा को भी संबोधित किया था. बाबा बालकनाथ ने अपने पहले चुनाव में बीजेपी वर्ष 2019 में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं पूर्व राजपरिवार के सदस्य धनंजय सिंह को बीजेपी ने हराया था। 38 साल के बाबा बालकनाथ आज मेवात इलाके के बड़े हिंदू नेता के रूप में पहचाने जाते हैं।
महंत चंदननाथ के बेदा करीब रह रहे हैं बाबा बालकनाथ
बाबा बालकनाथ मूलतया अलवर जिले के बहरोड क्षेत्र के मोहराणा गांव में रहने वाले हैं। बाबा बालकनाथ लगभग पिछले वर्ष तक हनुमानगढ़ जिले के आश्रम में स्थित थे। वे महंत चांदनाथ के तारामंडल रह रहे हैं. महंत चंदननाथ भी प्रारंभिक दिनों में हनुमानगढ़ स्थित इसी आश्रम में रहते थे। महंत चंदननाथ विश्वनाथ के बहरोड से वर्ष 2004 में विधानसभा में विधायक चुने गए थे।
महंत चन्द्रनाथ ने किला फतह से विपक्ष का चुनाव कराया था
बीजेपी ने बाद में मेवात के जनजाति क्षेत्र में नाथ संप्रदाय के प्रभाव को देखते हुए 2014 के लोकसभा चुनाव में चांदनाथ को मैदान में उतार दिया था. महन्त चन्द्रनाथ कांग्रेस मठापति सिंह को डेमोक्रेट बने। लेकिन बाद में लंबी बीमारी के कारण जीवित बचे महंत चंद्रनाथ का निधन हो गया। उनके बाद नॉमिनेशन के सामान्य में बीजेपी ने यहां से जसंवत सिंह को चुनावी मैदान में उतारा। उनका मुकाबला पूर्व सांसद डॉ. करण सिंह हुआ लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली। इससे पहले विपक्ष की सीट बीजेपी के हाथ से निकल गई।
बीजेपी ने खोई सीट को वापस पाने के लिए यंगनाथ पर दांव खेला
इस पर बीजेपी इलाके में खोई हुई अपनी वापसी सीट पाने के लिए महंत चांदनाथ के उत्तराधिकारी बाबा बालकनाथ के लिए वर्ष 2019 के लिए लोकसभा चुनाव मैदान में उतरें। बाबा बालकनाथ चुनाव में विजयी हुए। वहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा शुरू हुई। उसके बाद बीजेपी ने इस बार अल्पसंख्यक बहुसंख्यक तिजारा सीट को हथियाने के लिए यहां बाबा बालकनाथ पर दांव खेला है। बाबा बालकनाथ भी कई बार अपने सैमुअल बोल के कारण चर्चा में रह चुके हैं।
सामाजिक प्रभाव के लिए प्रसिद्ध है मठ
आठवीं शताब्दी में हरियाणा के मंदिरों में स्थापित और करीब 150 तीर्थयात्रियों में श्री बाबा मस्तनाथ मठ के आध्यात्मिक, धर्मार्थ चिकित्सा और आध्यात्मिक अध्ययन के लिए जगप्रसिद्ध है। महंत चंदननाथ के उत्तराधिकारी बाबा बालकनाथ बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं। उनके सानिध्य में वर्तमान में दो डायनासोरों से अधिक अनुयायियों, स्मारकों, पुस्तकालयों और स्मारकों का संचालन जारी है।
संस्कृत, राजस्थानी और पंजाबी भाषा के भी महान विद्वान हैं बाबा
नाथ सम्प्रदाय के सबसे बड़े अस्थल बोहर मठ के मठाधीश के रूप में सहायक रहे बाबा बालकनाथ संस्कृत, हिंदी, राजस्थानी और पंजाबी भाषा के अच्छे अनुयायी माने जाते हैं। वे अब अपने गुरुजी की राजनीतिक विरासत को कायम रख रहे हैं। इस बार पार्टी ने तिजारा जैसे राजनीतिक समीकरणों वाली सीट पर अपनी राजनीतिक विद्वत्ता स्थापित करने की चाहत रखी है। बीजेपी का यह दांव शत प्रतिशत होगा तो मूल के बाद ही सामने आ जाएगा। बिजनेस यह सीट बेहद चर्चा में है।
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पहले प्रकाशित : 3 दिसंबर, 2023, 05:20 IST
