पीयूष शर्मा/मुरादाबाद: वर्तमान स्थिति में मोबाइल हमारा एक आदर्श अंग बन गया है। मोबाइल पास न हो तो मानो ऐसा लगता है कि हमसे हमारी कोई खास चीज दूर हो गई है। बच्चों में भी धीरे-धीरे धीरे-धीरे मोबाइल का क्रेज लगातार बढ़ रहा है और लगातार बढ़ रहा है। इस मोबाइल की लता के कारण बच्चों से लेकर बड़ों तक को लेकर बातचीत का सामना करना पड़ रहा है। उन्ही में से एक समस्या है टेक्स्ट नेक सिंड्रोम की. जो लगातार जिला अस्पताल के सामने आ रही है।
जिला अस्पताल में जिले के कोने-कोने से मरीज इलाज के लिए आते हैं। जिसमें हड्डी विभाग में प्रतिदिन लगभग 250 रोगी पहुंच रहे हैं। इसमें कई युवाओं और बच्चों को मोबाइल फोन से दिक्कत हो रही है। जिसका वह इलाज कर रहे हैं. जब आपकी जानकारी होती है तो साफ तौर पर उनका कहना रहता है कि हमने मोबाइल फोन का तीन घंटे तक इस्तेमाल किया है और हमारे शरीर और शरीर के इन हिस्सों में इन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण से स्पष्ट उदाहरण हो रहा है कि फोन से ही यह सामने आ रहा है।
क्या है टेक्स्ट नेक सिंड्रोम
जिला अस्पताल के वरिष्ठ आर्थो चिकित्सक डाॅ. शेर सिंह कक्कड़ ने बताया कि इस पाठ में नेक सिंड्रोम कहा गया है। लगातार अंगूठा खाने से प्लांट में थकान हो जाती है। दाढ़ी कर काम करने से गर्दन पर भार आता है। अधिक दिनों तक झुका कर मोबाइल फोन पर काम करते रहने से गर्दन भी झुकाई जाती है। गरीबों में हर रोज 20 से 25 मरीज सामने आ रहे हैं और रोजाना इस समस्या के मरीज सामने आ रहे हैं। इन सभी की उम्र की बात करें तो आयु वर्ग 14 से 40 वर्ष के बीच है। इसमें हाथ में लगातार दर्द बने रहना, गर्दन में अकड़न और हाथ में बेचैनी होने के लक्षण रहते हैं।
यह दी सलाह
डॉक्टर शेर सिंह कक्कड़ का कहना है कि इस तरह की चेष्टाएँ लगातार बनी रहती हैं। प्रतिदिन अस्पताल में इसके लैपटॉप सामने आ रहे हैं। इस समस्या से उपकरण प्राप्त करने के लिए फ़ोन का उपयोग कम से कम करें। हेडलाइन कर फ़ोन कनेक्टिविटी और एक ही बिकवाली से ना फ़ोन कनेक्टिविटी। अगर फ़ोन का काम भी है. तो हाथ चला रहे. उसके बाद ही फोन करें और कोई भी समस्या होने पर अल्ट्रासाउंड स्वास्थ्य केंद्र पर जानकारी कर अपना उपचार कर लें।
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पहले प्रकाशित : 2 दिसंबर, 2023, 13:16 IST
