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छत्तीसगढ़ में भाजपा की जीत की चौकड़ी, रणनीति, कार्यकर्ता, जोश और विश्वास, एकमत फेसबुक-सीएम की रेस


रायपुर. जहां धुरंधर राजनीतिक पंडित उद्योगपति चल रहे थे कि छत्तीसगढ़ में चंबा में बाहुबली सरकार बांडी रहेंगे, वहीं भाजपा के प्रचंड जीत ने सभी को गलत साबित कर दिया। इस शानदार जीत का सबसे बड़ा कारण बीजेपी मुख्यालय में लगे होर्डिंग का सामने आना है। होर्डिंग ने लिखा था कि ”सपने नहीं हकीकत बुनते हैं तो सभी मोदी को योगदान देते हैं।” भाजपा नेताओं और वकीलों का स्पष्ट रूप से आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी की साजिश, मिर्जा अमित शाह की रणनीति और भाजपा अध्यक्ष तेज गेंदबाज के नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ में फिर से कमल का काम किया। हालांकि इस जीत में बीजेपी की चौकड़ी भी अहम भूमिका निभा रही हैं.

इन सभी के अलावा प्रचंड की जीत के पीछे इन नेताओं के निर्देशन पर काम कर रही चौकड़ी ने छत्तीसगढ़ में कमल के किरदार में अहम भूमिका निभाई। ये चौकड़ी सीधे थिएटर लीडरशिप के निर्देश पर छत्तीसगढ़ को मथने का काम कर रही थी। इस चौकड़ी ने ऐसा रंग जमाया कि मतदान से पहले अपराजेय लग रही रालोसपा की सरकार के चुनावी नतीजों में चारो खाने की बात हो गई। इससे भी बड़ी बात यह है कि चुनावी नतीजों की घोषणा तब तक की जा चुकी है जब तक अंदरखाने की भगवा लहर को वोट न मिल जाए, लेकिन वोट न मिल जाए। आइये इस चौकड़ी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

ॐ मथुरा- उजाड़ विशेषतया जमीन को सींचा
बीजेपी के बेहतरीन रणनीतिकार और कद्दावर नेता माने गए हैं ओम मथुरा. विशेष रूप से बंजर भूमि में कमल की तलाश के लिए प्रधानमंत्री मोदी और संदिग्ध शाह की पहली पसंद पर मथुरा का नाम सामने आया है। मथुरा के विशेषज्ञ का गलत अनुमान यह लगाया जा सकता है कि छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी को ही बनाया गया था, लेकिन चुनाव के साथ ही चुनाव प्रभारी भी बना दिया गया, जबकि भाजपा नेतृत्व में हमेशा प्रदेश प्रभारी और चुनाव प्रभारी के रूप में अलग-अलग नेता शामिल होते रहे। है.

ॐ मथुरा- अचूक नीति से विरोधी धाराशायी
ओम मथुरा की बुजुर्गता और गोपालगंज की छवि ये आ रही है कि प्रदेश बीजेपी की गुटबाजी उभर कर सामने नहीं आ रही है और उनकी मान्यता को लेकर छोटे मठाधीश ने वफादारी के साथ माना है। ओम मथुरा अपने संगठन में जान फायन के लिए पूरे प्रदेश में तुफानी दौरे पर आये। 10 महीने पहले आय मथुरा ने ग्राउंड लेवल पर एसोसिएटेड कंसलटेशन और पोर्टफोलियो सरकार को साथ लाने के लिए म्यूजिक लीडरशिप के साथ मिलकर अचुक स्ट्रेटेजी बनाने का काम किया।

मनसुख भाई मांडविया-सीधा संवाद और सख्त टैग
छत्तीसगढ़ चुनाव सह प्रभारी के तौर पर स्वास्थ्य मंत्री मनसुख भाई मांडविया को जिम्मेदारी दी गई। मनसुख मांडविया को रणनीतिक आधार पर सूचीबद्ध किया गया मासिक आधार माना जाता है। पिछले गुजरात चुनाव में भी रिकॉर्ड तोड़ जीत में उनकी बड़ी भूमिका रही थी। छत्तीसगढ़ चुनाव के समय बूथ लेवल तक उन्होंने खुद बैठकें करके स्थानीय पुरातत्वविदों से संपर्क स्थापित किया था। इसके अलावा लीडरशिप से सीधे संवाद और सशक्त टेप भी अपने मूल रूप में पाए जाते हैं। मोदी सरकार द्वारा जारी जा रही गरीबों के स्वास्थ्य मंत्रालय के बारे में भी उन्होंने जन जागृति की।

नवीन नवीन- युवाओं में जगाया जोश
बिहार बीजेपी के महासचिव और बिहार गठबंधन सरकार में युवा कैबिनेट के मंत्री के तौर पर अपनी अलग छाप छोड़ कर नवीन को प्रदेश सह प्रभारी बनाया गया है. नोबल न्यू ने अपनी छवि के स्ट्रक्चर ऑफसेटिव स्टाइक को अलग कर दिया। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के युवाओं को प्लास्टिक की दुकानों के खिलाफ अमलीजामा पहनावे की योजना। नवीन के नेतृत्व में ही गरीब विरोधी गुट को लेकर विधानसभा का चुनाव हो या फिर नामांकन के घर के बाहर प्रदर्शन हो, इसमें काफी बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी देखने को मिली।

नवजात शिशु- गरीब और जातियों में जगाया विश्वास
गोठान मुद्दे को जब प्रदेश नेतृत्व के चयन से नहीं हटाया गया तब तक नवीन ने ही आयन नेतृत्व को लेकर इस पर बड़ा अभियान शुरू किया था। इसके साथ ही गरीबो, ईसाइयों को बीजेपी पर विश्वास के लिए नारा दिया गया था कि बीजेपी के सीएम अपने इलाके में टैब करेंगे, जब पहली बार कैबिनट में गरीबों के आशियाने के बिल पर सिगनेचर जाएंगे। साफा का उनके वेबसाइट पर प्रकाशित आर्टिकल आज सामने आया है।

डेवेलेंट साव- एकमुश्त फेस और सीएम की रेस
छत्तीसगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष और बिलासपुर से नाबालिग हैं। अविश्वासी समुदाय से आये हैं और छात्र राजनीति से ही संगठन में सक्रिय हैं। एबीवीपी के प्रदेश मंत्री भी रह रहे हैं, शेष राजवंश को चुनाव से पहले जिले की प्रदेश टीम की कमान सौंपी गई। संघ परिवार में भी अच्छी पकड़ के बने रहने का मौका लोरमी विधानसभा से अपनी सीट के साथ पूरे प्रदेश में त्रिपुरा सरकार के खिलाफ मोरचा बनाने का काम किया। वेलनेस साव सीएम बनने की रेस में भी हैं.

खूब चला ‘महतारी वंदन योजना’ कार्ड
इस पूरी टीम की रणनीति के कारण ही इस जीत में महिलाओं की बड़ी भूमिका रही जिसके कारण बीजेपी की जीत की पटकथा लिखी गई। पहले चरण में कुल पुरुष मुकाबले से भी करीब 91 हजार से ज्यादा महिलाओं ने बीजेपी के लिए वोट किया, वहीं, बाकी के नतीजों से 90 में से 51 पुरुषों से ज्यादा से ज्यादा महिलाओं ने वोट किया. महतारी वंदन योजना के बारे में छत्तीसगढ़ जीत का मास्टरस्ट्रोक बताया जा रहा है।

स्मृति के रिकार्ड किये गये सन्देश का मूल प्रभाव
बताया जा रहा है कि करीब 44 लाख से अधिक महिलाओं ने इस योजना का लाभ लेने के लिए नामांकन पत्र और इसके अलावा बीजेपी ने देश भर की महिलाओं की सूची में लोकप्रिय नेता और धार्मिक मंत्री स्मृति ईरानी का रिकॉर्डेड संदेश भी छत्तीसगढ़ की महिलाओं तक जारी रखा है। स्मृति ईरानी के इस मोबाइल संदेश में प्लाज़्मा सरकार के तख्तापलट के रूप में लगभग 78 लाख महिलाएं शामिल होने का मामला सामने आया है।



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