दौलत की चाट: स्वाद के शौक़ीन हर गली-मुहल्लों को सस्ते दाम मिलते हैं। अगर आप भी जापानी शौकीनों में हैं तो इस नायब चीज के लिए आप भी शौकिया चौक की स्ट्रेटेजी में फिर से निकल चलेंगे। जी हां, यह जिस चीज़ को बनाने का मसाला है वह बेहद ही स्वादिष्ट है। जिस तरह इसका नाम लेबल की चाट है, उसी तरह इसे बनाने की प्रक्रिया भी बहुत जटिल और मेहनत वाली है। स्टॉल की चाट को बनाने के लिए मास्टर असिस्टेंट चौक में पूरी रात खुले आसमान के नीचे दूध को फेंटते रहते हैं और इसके बाद इसे बेहद जटिल प्रक्रिया के तहत बनाया जाता है। रात में इसे क्रीम के साथ बाहर ही छोड़ दिया जाता है। नमक की चाट, चाट की तरह तरह की नहीं बल्कि मीठी डिजर्ट होती है। इसे मलाई मक्खन भी कहा जाता है. इसमें दूध, क्रीम और केसर का उपयोग किया जाता है। पराठा वाली गली में की कहानी चैट पहेली चौक में है। एस्टामेट की चाट कई सेलेब्रिटी को बहुत पसंद है। इनमें से एक्टर्स सौरभ शुक्ला को बेहद पसंद किया जाता है।
नमक चाट बनाने की प्रक्रिया
सबसे पहले बताएं कि ये चैट नहीं है. मेवा-मलाई मखनी है. इसे बनाने के लिए रात को खुले आकाश के नीचे एक बड़ी कड़ाही में दूध को मथा जाता है। दूध को इतनी देर तक मथा जाता है कि इसमें से ज़ग पाया जाता है। इसी झाग से नमक की चाट बनाई जाती है. अब दूध के मथने से जो झाग नारियल है और उसे एक खसखस पोज़ में रखा जाता है। इसे अवकाश में रखा जाता है। यानी एक बार झाग रखा जाता है फिर से पिंच में भर चीनी और क्रीम रखा जाता है। दूध में केसर और मेवा हजारों बार फेंटा जाता है। ध्यान रहे कि यह सिर्फ सर्द रातों में बना है। यानि दिसंबर और जनवरी के आसपास। इन साड़ी मसाला को रात भर इस पॉट को छत पर या बाहर ही छोड़ दिया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि यह डिजर्ट या मिठाई बहुत कम समय के लिए उपलब्ध है। कुछ देर बाद ऐसा लग रहा है. इसका मतलब है धन की चैट कहा जाता है।
ज़ायकेदार चौक में रेस्तरां है यह मिठाई
नमक की चाट एक मलाईदार सूप की तरह है जिसे बेहद करीने से बनाया जाता है। यह अद्वितीय, मित्रतापूर्ण व्यंजन विशेष चौकोर में है। फ़ास्ट चौक में पराठे वाली स्ट्रीट में कई आतिथ्य या थियों में स्ट्रॉ की चाट मिल जाएगी। पराठे वाली गली में ऑर्डर कुमार की दुकान में दुकानों की चाट मिलेगी।
नमक की चाट का इतिहास
ऐसा माना जाता है कि नमक की चाट मुगल काल से शरारती चौक में बनाई जाती है। इससे पहले कजाकिस्तान की बोताई जनजाति टूटे थे। मुगलों के साथ वहां से आये खानसामों ने इसे बनाना शुरू कर दिया। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि मुगल बादशाह शाहजहां की बेटी जहांआरा ने पहली बार उस समय का लॉज रिजॉर्ट खोला था। इस रिजॉर्ट में ऑटोमोबाइल की चाट बनाई गई थी।
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पहले प्रकाशित : 3 दिसंबर, 2023, 13:58 IST
