Homeहेल्थ & फिटनेस15 दिसंबर तक रिवाइवल खुरपका-मुंहपका रोग के फायदे, जानिए फायदे और कारण

15 दिसंबर तक रिवाइवल खुरपका-मुंहपका रोग के फायदे, जानिए फायदे और कारण


वर्ष 2019 पाठक/अलवर. डेट के सीज़न की शुरुआत हो चुकी है। ठंड के मौसम में सर्दी की सर्दी में वृद्धि होती है। समुद्र तट का असर कहीं और भी देखने को मिलता है। चूँकि बार-बार गाय, बकरी, बफ़ेलो में ग़ायबों के समय शीतपिल्ला और निमोनिया की शिकायत देखी जाती है। ऐसे में साइबेरिया को छुड़ाने के लिए विशेष रूप से अभियान चलाया जा रहा है। जो कहीं ना कहीं समुद्र को बीमार होने से बचाएगा। पूर्वोत्तर जिलों में राष्ट्रीय पशु रोग कार्यक्रम नियंत्रण के तहत खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। जानकारी के अनुसार अभी तक 65 हजार 350 दुकानदारों के पास स्टॉक है। यह अभियान 15 दिसंबर तक चलेगा।

प्रोग्राम के प्रोग्राम अधिकारी डा. राजीव कुमार मशविरा ने बताया कि इस अभियान के तहत किसानों को मुफ्त में स्टॉक की तलाश करनी होगी। कुर्पका-मुंहपका रोग अति संक्रमणीय वायरस जनित रोग हैं। यहाँ पर आपको एक तरह का आटा और खुर में चले जाने से बचना चाहिए। जिस कारण दुधारू संयंत्र में दुग्ध उत्पादन बेहद कम हो जाता है। इससे पशुपालकों को भी आर्थिक क्षति होती है।

खिलौने का ऐसी अनोखी प्रक्रिया
शून्य के सीज़न में किसानों को परमाणु ऊर्जा से बचाव की आवश्यकता है। ससुराल वालों के लिए यह सच है। जिसके कारण निमोनिया से मुक्ति के लिए ताजा हरा चारा के साथ सब्जियां खिलाएं। ताजी पानी की आपूर्ति मलेरिया से मुक्ति के लिए भी यह कमेंट्री सहायक होती है। चोरों को नज़र ना लगे, इसके लिए उनके बाडे के बाहर का नजारा देखा जाए। शरीर को बोरी व तत् से ढका जाए। इस मौसम में ठंड लग जाती है. इसलिए बकरी के अंदर सूखी मिट्टी डालना चाहिए, गाय भाईयों के बच्चों में भी निमोनिया की समस्या अधिक होती है।

टैग: अलवर समाचार, स्वास्थ्य, स्थानीय18, राजस्थान समाचार



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