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चेहरे से शुरू हो गया दाग-धब्बे या भागना हो गठिया का दर्द, 32 घरों में रामबाण है रसोई में रहने वाला यह मसाला


आशीष कुमार/पश्चिम चंपारण. आयुर्वेद में प्रमाणित औषधीय औषधीय एवं फार्मास्यूटिकल्स में हल्दी का एक अहम स्थान है। यह एक आयुर्वेदिक औषधि है, जो कई बीमारियों को दूर करने में सहायक है। हल्दी की तासीर गर्म होती है, इसलिए गर्मियों में इसका उपयोग कम हो जाता है। हालाँकि कुछ फूलों का उपयोग गर्मियों में भी किया जाता है। वहीं अगर बात जाए कि समुद्र की तो, समुद्र में इसका उपयोग कई गुना बढ़ जाता है।

आयुर्वेदाचार्य भुवनेश पांडे सहित अन्य स्टोर्स की माने तो यह एक सुपर मिसाइल मसाला है, जिसके आपको कई फायदे हो सकते हैं। यह एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-एक्विटी गुण गुणात्मकता होती है। हल्दी का उपयोग गठिया, मधुमेह, त्वचा के रोग, हाथ-पैर फटना, टॉन्सिल, रोग जोड़ क्षमता में वृद्धि, चोट लगना, दांत में दर्द, खुजली और चेचक तक किया जाता है।

मधुमेह और त्वचा संबंधी सभी गोदामों में ऐसे इस्तेमाल किया जाता है

आयुर्वेदाचार्य की माने तो मधुमेह में बार-बार हो रहे पेशाब से राहत के लिए 1 पिसी हुई हल्दी को फांकर पानी पीने से मरीजों को आराम मिलता है। इसके अलावा 8 ग्राम पिसी हुई हल्दी रोजाना दो बार पानी के साथ फेन्की के रूप में लेने से भी बार-बार और अधिक मात्रा में पेशाब का आना, ज्यादा मात्रा में पिसी होने से आराम मिलता है।

यदि आप चर्म रोग से ग्रस्त हैं, तो हल्दी को पीसकर तिल के तेल से मालिश करें। इससे चर्म रोग ख़त्म हो जाएगा। कच्चे दूध में पिसी हुई हल्दी त्वचा पर मसाज करने से त्वचा की झलक मिलती है। साथ में हाथ-पैर भी नहीं फटते हैं. इतना ही नहीं, 10-10 ग्राम हल्दी और तिल को पीसकर पानी में पूरी रात को गर्म समय पर लगाने से और सुबह पानी से धो लेने से झांह अलग हो जाती है, और चेहरे पर चमक आ जाती है।

शरीर की तोड़-फोड़ और टुकड़ों में उपयोग किया गया

हल्दी का उपयोग शरीर को मजबूत और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है। इसके लिए 500 ग्राम हल्दी की गांठ और एक किलो का मोटा हुआ कोयला लेकर मिट्टी के बर्तनों में बने टुकड़े, इसमें ऊपर से 2 किलो पानी डाल लें. पानी डाला ही जाता है। जब यह ठंडा हो जाए तो पॉश्चर को पढ़कर रख दें। करीब 2 महीने बाद हल्दी के दांतों को प्रतिष्ठित पीसकर केश बनाया गया।

अब हल्दी के दांतों के आकार को 3 ग्राम की मात्रा में लेकर 10 ग्राम शहद के साथ मिलाकर प्रतिदिन 4 महीने तक खाने से शरीर का खून साफ ​​हो जाता है और इससे शरीर में भरपूर ताकत भी आ जाती है। इसके अलावा चोट के निशान और हड्डियों के घावों को दूध के साथ मिलाकर हल्दी का सेवन या फिर पेस्ट बनाने से भी चोट के निशानों को चोट पर सेंकने या फिर पेस्ट करने से आराम मिलता है।

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पेट दर्द, गठिया, खुजली और चेचक भी घर में

अन्यथा माने तो पेट दर्द, गठिया, खुजली और चेचक में भी हल्दी का प्रयोग किया जाता है। गैस की वजह से पेट में बहुत तेज दर्द की स्थिति में पिसी हुई हल्दी और सेंधा नमक 5-5 ग्राम की मात्रा में पानी से लें। गठिया रोग में हल्दी का लोध खाने से आराम मिलता है। इसके अलावा शरीर के पीले रंग के दानों में मवाद भरा होता है और इसमें खुजली होती है तो एक मिरगी हल्दी, एक कप गर्म दूध, तीखा पाउडर देशी घी और स्वाद के लिए स्थूल मिश्रण सुबह-शाम पीने से लाभ मिलता है।

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