जयपुर/भोपाल. राजनीति के महामार्ग पर दो दिग्गजों की साख को रिबूट करना है। ये दिग्गज हैं मोनोसैक और अशोक मोबाइक। राजनीति के इन दिग्गजों को अपनी राजनीतिक के इस चरण में हार का स्वाद चखना पड़ा है। असोसिएट और उनकी तस्वीरों को पूरी उम्मीद थी कि इस बार कलाकार उन्हें चुनेंगे। उनकी इस उम्मीद का आधार ये था कि उनकी ‘पेस्ट की राय’ में उनके साथ ‘दगा’ हुई है. साल 2018 में जनता ने उन्हें चुनकर सरकार बनाने का मौका दिया था, लेकिन अल्मोस्ट के पाला बदल से सरकार गिर गई। इसे लेकर समर्थक प्रचार कर रहे थे कि जनता ने कांग्रेस को चुना लेकिन बीजेपी ने सरकार बना ली. इन लोगों को उम्मीद थी कि इस प्रचार से सहानुभूति वोट और कांग्रेस को जोड़ा जाएगा। गूगल के मुर्गे को भी जीत की उम्मीद थी. नतीजे सामने हैं. दोनों की पराजय हुई. हालाँकि, देश की राजनीति में ऐसे उदाहरण शायद ही मिलें कि किसी नेता ने उस तरह की राजनीति से संन्यास ले लिया हो, खेल से खिलाड़ी किसी भी तरह का समय ले लें। वैसे भी डायनासोर मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं।
उत्तर
चुनावी नतीजों के बाद अब इन दोनों की राह कठिन दिख रही है। एक सफल उद्योगपति भी हैं। इस क्षेत्र में उनका ठीक-ठाक धक और साख दोनों हैं। संजय गांधी के उदय के साथ कांग्रेस की राजनीति में उतरने वाले नारे आम तौर पर केंद्र की ही राजनीति तक महदूद बने रहे। माधवराव अस्सी के दौर में भी कांग्रेस की राजनीति में आ चुके थे। वे चुनाव तो संसद की लड़ाई में थे लेकिन उनका गठबंधन भी भोपाल की कुर्सी पर ही था। ऐसा माना जाता है कि डायनासोर और निकोलस एकजुट हुए।
फैक्टर
ये एकजुटता 2019 तक बनी रही। इस बार ऑर्केस्ट्रा को सीएम बनने से लाभ हुआ। ये भी हुआ और दोनों दिग्गजों की रणनीति ने तीसरे को मुख्यमंत्री बनने से रोक दिया, लेकिन इसका नतीजा यहां तक पहुंचा। साल 2023 के चुनाव में कांग्रेस ही सत्य तक नहीं पहुंची। अब असली सिंह के सामने तो राह है. कांग्रेस की फर्स्ट फैमिली में उनकी ठीक-ठाक पकड़ भी बताई गई है। राहुल गांधी की यात्रा के दौरान ये सब देखने को भी मिला था, लेकिन अब राहुल-प्रियंका की गर्लफ्रेंड पकड़ में आए राहुल-प्रियंका तक हो गए हैं. वैसे भी कांग्रेस कई बार युवाओं को जोड़ने का नारा लगाती है। कांग्रेस को आने वाले लोक सभा चुनाव के लिए भी उन स्मारक की तलाश होगी जो पूरा समय लेकर पार्टी का बेड़ा पार करे। नकुल नाथ के बेटे नकुल नाथ राजनीति में हैं और टिकट्स युगल के दौरान उन्होंने अपनी बिकवाली जारी की है।
अशोक डॉ
अब बात अशोक फोटोग्राफर की. सचिन पायलट की पहली बगावत के दौरान ‘गांधी-परिवार’ ने उनकी ताकत का साथ दिखाया था। जबकि राजस्थान में टिकट बुक के दौरान साफा दिखाया गया कि कांग्रेस की इस ‘फर्स्ट फैमिली’ ने उनका साथ नहीं दिया। हां, जर्जर और जर्जर वस्तुओं के लिए कांग्रेस आलाकमान ने दस्तावेजों के अनुसार टिकट जरूर दिए। अब हार की ज़िम्मेदारी भी नंगी के प्यारे मधेने की कोशिश होगी.
लैपटॉप के बेटे वैभव वैभव भी राजनीति में उतर चुके हैं। अब उनकी राह को आसान बनाना उनकी चाहत हो सकती है, जैसी होती है. क्योंकि जिस तरह से राजपूताना की राजनीति में युवराज ने अपनी ताकत से एक नया अनुपात बनाया और उसे आगे बढ़ाया, वैभव की राजनीति में वह ताकतवर हो जाएंगे। मान्यता तो यही मानी जा रही है कि राजस्थान कांग्रेस की ड्राइविंग सीट पर सचिन पायलट ही होंगे।
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पहले प्रकाशित : 4 दिसंबर, 2023, 14:01 IST
