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वास्तव में है कट्टर डेथ का रहस्य, समुद्र से है इसका नाता, न्युएरोसर्जन से जानें मुक्ति का उपाय


सेहत की बात: पौराणिक कथाओं के अनुसार लक्ष्मी नगर क्षेत्र से एक मामला सामने आया। करीब 64 साल की उम्र में जयनाथ सिंह ने अपने परिवार के साथ रात का खाना खाया। परिवार के साथ काफी देर तक चर्चा की और सोने चले गए। सुबह करीब चार बजे वह नष्ट हो गई और अचानक न जाने लगी, वह जहां गिर गई और वहीं पर मृत हो गई। जयन्त सिंह का यह एकलौता मामला नहीं, बल्कि समुद्र में हमें लगातार ऐसे मामले सुनने को मिल रहे हैं। ऐसे में, बड़ा सवाल यह है कि संन्यासी में होने वाली मृत्यु का रहस्य क्या है? इसका असली से कोई संबंध भी नहीं है?

राम मनोहर अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी के अनुसार, हांए साधक में होने वाली वग्गन डेथ (अचानक) की मौत का पुनरुत्थान होता है। अरेस्ट, ब्रेन में रहने वाली अचालक की मृत्यु की मुख्‍यम्‍यता वंदनीय है डायरॉक या होने हार्ट केयरोक। ऐसा नहीं है कि समरस में ब्रेन कैरेमोक या हार्ट डैमेरोक के मामले नहीं आते हैं, लेकिन समंदर में कैरेमोक के केस में करीब-करीब दो गुना तक की बढ़ोतरी देखने को मिलती है। असल, समुद्र तट के साथ, ब्रेन और हार्ट मेमोरियलोक के रिस्क फैक्टर तेजी से प्रभावशाली हो जाता है। वहीं, इन रिस्क फैक्टर के प्रति रिज़ल्ट नजरिया रखने वाले भी रिस्क फैक्टर के शिकार बन जाते हैं।

ब्रेन ब्रेनटोक के रिज़ाक फ़ैक्टर
डॉ. अजय चौधरी ने कहा, ब्रेन केयरोक के दो बड़े कारण हैं, पहला-बाइबॉल्ड प्रेशन और दूसरा-हाइपरटेन लिपिडेमिया। असल, अराम की दस्तक के साथ मानव शरीर के ब्लूटूथ म्यूजिक में तेजी से बदलाव आना शुरू हो जाता है। यह बदलाव बदलाव (अर्ली मॉर्निंग) सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में, जिन लोगों को बाथरूम में रहने की शिकायत रहती है, उन्हें विशेष रूप से इस बात पर ध्यान देना चाहिए। एक शोधकर्ता ने देखा कि आपके बीपी के प्रति आश्वस्त लोग जैसे ही अपनी रजाई या कंबल से बाहर निकल कर चले जाते हैं, उनका बीपी तेजी से बढ़ जाता है, दिमाग की नसें रिंक की वजह से उनकी जगह मौत हो जाती है।

तस्वीर: मूल में शामिल है डेथ का रहस्य, न्युएरोसर्जन से जानें मुक्ति का उपाय

हाइपरटेन लिपिडेमिया क्या है?
डॉ. अजय चौधरी के अनुसार, हमारे खून में दो तरह के कोले चमत्कार होते हैं; पहला – अचेचा कोले डेरेवाल, जिसे हम, एचडीएल (HDL) कहते हैं। दूसरा है – बैड कोले डेवेलपॉल, जिसे हम एलडीएल ( LDL ) कहते हैं। जब रक्त में एलडीएल की मात्रा बढ़ती है, तो ऐसी स्थिति को हाइपरलिमिडेमिया कहा जाता है। हाइपरलिमिडेमिया की स्थिति में कोलेस्ट्रॉल के साथ-साथ अन्य घटक पदार्थ खून की नाल में जमा होना शुरू हो जाते हैं। खून की नालियों में जमा होने वाले पदार्थ को प्लाक कहा जाता है। इन दहिन प्लाक की वजह से मस्ती या दिल की नाव में ख़ून का बहाव बंद हो जाता है, जो बर्बाद की वजह बन जाता है।

किसको है सबसे ख़तरनाक?
डॉ. अजय चौधरी के अनुसार, शोर मचाने वालों के साथ-साथ ब्रेन एल्डरोक का खतरा भी बहुत अधिक होता है। इसके अलावा, ब्रेन स्मोकिंग को बड़ा रिस्क फ्रैक्टर के रूप में भी जाना जाता है।

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