ओपीपी/सोपानकोरबा. आजकल देखा जा रहा है कि लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर बेहद चिंतित रहते हैं और अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हर प्रकार के जतन करने को तैयार रहते हैं। ऐसे ही आजकल लोग किसी के द्वारा भी बताए गए या सुनने के बाद कई प्रकार के औषधीय उपचार या उनके फलों के रसों का सेवन करते हैं। लेकिन लोगों को यह नहीं पता कि आयुर्वेद में हर आयुर्वेदिक रस के सेवन का नियम भी बताया गया है।
यदि कोई व्यक्ति ऐसे आयुर्वेदिक रसों का सेवन कर रहा है, तो इसकी जानकारी नहीं है कि कब और कैसे, किस औषधीय उपचार या उसके फल के रसों का सेवन करना चाहिए, उन्हें इसका दुष्परिणाम भी झेलना पड़ सकता है। इस विषय को लेकर आएं हम आज आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर नागेंद्र नारायण शर्मा से बातचीत की।
भोजन पीने से पहले लें सलाह
आयुर्वेदिक चिकित्सा नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद में हर व्यक्ति की प्रकृति को अलग-अलग बताया गया है। प्रकृति के अनुसार हर व्यक्ति की चिकित्सा और आहार अलग होता है। किसी के भी सुझाव के अनुसार लोग गिलोय, एलोवेरा, तुलसी, हर्बल जैसे रसों का सेवन करते हैं। ऐसा करने से व्यक्ति को इसका दुष्परिणाम भी झेलना पड़ सकता है। इसलिए अगर आप भी किसी प्रकार के रसों का सेवन करने जा रहे हैं, तो सबसे पहले एक बार आयुर्वेदिक चिकित्सक या जानकार से इसकी सलाह लें। साथ ही, इस बात की जानकारी आप पास से ले रहे हैं। उस व्यक्ति को जानकारी जरूर होनी चाहिए।
एलोवेरा, गिलोय और संरचनात्मक तत्वों के फायदे
1) एलवेरा, गिलोय और जड़ी-बूटियों का भोजन पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
2) वेट लॉस के लिए भी एलोवेरा, क्वेश्चन और गिलोय बेहद उपयोगी है।
3) इस उत्पाद को पीने से इम्युनिटी मजबूत हो सकती है।
4) एलोवेरा, गिलोय और आंवले के सेवन से शरीर को डिटॉक्स करने में फायदा होता है।
5) हर्बल, गिलोय और एलोवेरा के खाद्य पदार्थों के सेवन से त्वचा को लाभ होता है।
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पहले प्रकाशित : 6 दिसंबर, 2023, 14:47 IST
