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खाने में बहुत मजा आता है लेकिन शरीर बन जाएगा अस्थायी का घर, इस तरह के भोजन से खरीदें सहयोगी


अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के दुष्प्रभाव: जीवन जीने के लिए हमें भोजन की आवश्यकता है। भोजन से हमारे शरीर में ऊर्जा संरचनाएं हैं और इसी से हम सारा कार्य करते हैं। लेकिन हमारा जो खान-पान है वह बहुत बुरा है। कुदरत ने जो चीज़ हमें खाने के लिए दी है, उसे हम अलग कर देते हैं। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ार्म ऐसा ही डिटैचर्ड फ़ार्म है जिससे फ़ायदा कम होता है। जिन कुदरती ने कहा कि हम कई बार अपने वास्तविक ढांचे में बदलाव करके उसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ कहते हैं। मैदा, चीनी, जंक फूड, फास्ट फूड इसके उदाहरण हैं। ये चीजें स्वाद में बेमिसाल होती हैं और इन्हें खाने में मजा भी आता है लेकिन ये अल्ट्रा फूड्स हमारे शरीर को धीरे-धीरे-धीरे-धीरे करके घर बना देती हैं। ये बात हमने नहीं बल्कि एक नए अध्ययन में कही है.

कैंसर और कैंसर का ख़तरा

स्टडी में कहा गया है कि जो लोग अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सबसे ज्यादा सेवन करते हैं, उनका कम सेवन करने वालों की तुलना में बीमारियां ज्यादा होती हैं। अध्ययन के अनुसार जिन नाइजीरिया में आर्टिफिशियल स्वीटनर या शुगरी ड्रिंक या एनिमल बेस्ड अल्ट्रा स्टोकेन्ड फूड जैसे स्टोकेल्ड मीट आदि खतरनाक बीमारी कैंसर, हार्ट डिजीज और टाइप 2 व्यावसाय के खतरे को कई गुना बढ़ा दिया जाता है। हालांकि अध्ययन में यह भी पाया गया कि प्लांट बेस्ड विकल्प जैसे कि मसाला प्लांट, मीठा प्लांट, ब्रेड, अनाज आदि से चैलेंज इन के जोखिम का कोई संबंध नहीं है। अध्ययन के अनुसार अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य उद्योग में रसायन के माध्यम से मिश्रण तैयार किया जाता है और इसे स्वादिष्ट बनाने के लिए कई तरह से सिंथ का परीक्षण किया जाता है या फिर मिश्रण मिलाया जाता है। इन खाद्य पदार्थों में रासायनिक रूप से भारी मात्रा में रसायनिक पदार्थ शामिल होते हैं और इसके लिए रसायनिक रूप से रसायनिक पदार्थ, रंग और स्वाद का उपयोग किया जाता है।

बीमारी का खतरा 9 प्रतिशत अधिक

अमीर देशों में रेडी माइल्स और स्टोर्ड स्ट्रेट का सबसे ज्यादा सेवन किया जाता है जो खतरनाक साबित हो सकता है। इस अध्ययन में 2.66 लाख लोगों के खान-पान का विश्लेषण किया गया है। पाया गया कि इसमें औसत एक पुरुष प्रतिदिन 413 ग्राम अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन का सेवन करती है जबकि महिलाएं 326 ग्राम प्रतिदिन अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन का सेवन करती हैं। 11 साल तक के स्वास्थ्य विश्लेषण के आधार पर पाया गया कि इनमें से 4,461 लोगों को कैंसर था और टाइप 2 के मरीज़ भी। अध्ययन के अनुसार जिन लोगों ने अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन किया, उनमें 9 प्रतिशत सामूहिक समूह के होने का खतरा अधिक था।

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