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पहले 72 घंटों में 40 मील तक ‘रौंडा’ दुशमन, फिर 5050 पाक सैनिक आए, जो भारतीय सेना का यह ‘महावीर’ है


‘यएच कहानी है भारतीय सेना के महावीर ब्रिगेडियर कैलाश प्रसाद पैंडे की। पिथ्यार से ब्रिगेडियर टॉम पैंडेज़ के नाम से भी पुकारा जाता था। ये बात आज से ठीक 52 साल पुरानी है. भारत और रेस्तरां के बीच 1971 का युद्ध शुरू हो गया था। पूर्वी मोर्चे पर चल रही ऑपरेशन कैट्स लिली की लड़ाई को अब भयंकर रूप में झेला गया था। इस लड़ाई का नेत्री सिद्धांत कर रहे हैं 61 माउंटन ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर शिव यादव बुरी तरह से घायल हो गए थे, जिससे युद्ध भूमि से बाहर निकाला गया था।

भारतीय सेना किसी भी कीमत पर ऑपरेशन कैट्स लिली में अब तक मिली सफलता और कुर्बानियों को जया नहीं जाना चाहती थी। रूप, चतुर्थ कोर के कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह ने ब्रिगेडियर कैलाश प्रसाद पैजेंड को 61 माउंटेन ब्रिगेड की कमान के साथ फिर से युद्ध में शामिल होने के लिए अंतिम निर्णय की जिम्मेदारी दी। ब्रिगेडियर पैंडेज़ ने 61 माउंटेन ब्रिगेड की गैलरी के साथ युद्ध की तैयारी की और 6 दिसंबर 1971 को वह दुस्साहसमन पर काल बन कर टूट पड़े।

अपनी ब्रिगेड के साथ अगली 72 घंटों में 40 मील की यात्रा तय की। इस यात्रा में रास्ते में आने वाली हर चुनौती और हर दुस्साहस को वह ‘राउंडेट’ चला गया। अब तक 40 मील के हिस्से पर आने वाले दुसामन के हर शेयर पर ब्रिगेडियर पैंडेज़ का कब्ज़ा हो गया था। ब्रिगेडियर स्केल पर नहीं। 9 दिसम्बर 1971 को 12 कुमाऊँ की इन्फैन्ट्री बटालियन और एक आर्मरियन को साथ लेकर आगे बढ़ाया गया। कुछ ही समय में साकिआ ढाका के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक बेहट मह सिद्धांत संचार केंद्र दाउदकंडी को अपने कबाड़ में ले लिया गया।

इसके बाद, ब्रिगेडियर पेंडाल ने मेघना नदी के दक्षिणी तट पर स्थित दाउद स्कैंडी स्टीमर स्टेशन को भी अपने केबिन में ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में सैनिक एकत्र हुए और दाउद स्कैंडी के बीच फंस गए। डुकसीमेंट ब्रिगेडियर पैंडेज़ की रणनीति और युद्ध कौशल को देखकर पूरी तरह से अचारज में पढ़ा गया था। उसके सामने अब पिशानखानों के सिवाए कोई रास नाव नहीं बची थी। अपने जान जोखिम में डालने के लिए मनामती के किले में पनाह ले ली, लेकिन ब्रिगेडियर पेंडेज़ के खतरे से वह खुद को बचा नहीं सके।

अंतत: महासभा ब्रिगेडियर पैंडेल के सामने एटमसमदर्पण कर दिया गया। 9 दिसंबर को मिली इस ज़बरदस्त सफलता के परिणामस्वरूप 1,500 पाकिस्तानियों को भी पकड़ लिया गया, जिसमें अमेरिकी सेना के एक कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल नाम भी शामिल थे। ईस्टर्न एमिशन पर स्याही सेना की तरफ से यह अब तक का सबसे बड़ा एटमसमदर्पण था। अब तक की लड़ाई में ब्रिगेडियर पैंडेल ने चांदिना, दाऊदखंडी और मैनावती को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया था। मैनावती की लड़ाई में ब्रिगेडियर पैंडेज़ के कौशल के सामने डुअस्सिमन को पूरी तरह से पीड़ित तकनीक से मजबूर होना पड़ा।

और, 16 दिसंबर को, पाकिस्तान के 117 इन्फैंट्री ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर शेख़ मंसूर हुसैन अतीफ़ ने अपने 50 अधिकारियों और 5,000 सैनिकों के साथ ब्रिगेडियर पैंडेज़ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस युद्ध में ब्रिगेडियर कैलास प्रसाद पैंडेज़ के नेतृत्व में कौशल और वीरता के प्रदर्शन के लिए भारत के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

टैग: भारत पाकिस्तान युद्ध, भारतीय सेना, भारतीय सेना के नायक, गुमनाम नायक



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