सिमरनजीत सिंह/शाहजहांपुर: जहां एक ओर कचौड़ी वाली अम्मा की आलू कचौड़ी बेहद मशहूर है। लेकिन यहां शंकर जी की खस्ता कचौड़ी को भी लोग खूब पसंद करते हैं. ख़ास बात यह है कि यहां अम्मा की कचौड़ी की दुकान पर रात के अंधेरे में बातें होती हैं। जिसका लोग रोज इंतजार करते हैं तो वही शंकर जी की खस्ता कचौड़ी खाने के लिए लोग सुबह के उजाले के इंतजार में रहते हैं।
खस्ता कचौड़ी की दुकान वाले हरिश्चंद्र गुप्ता का कहना है कि वह इस दुकान में पिछले 30 साल से खस्ता कचौड़ी की दुकान का काम करते आ रहे हैं। ऐसे ही खस्ता कचौड़ी बनाने का 65 साल पुराना तजुर्बा है। वह खस्ता कचौड़ी को खास तरीकों से बनाते हैं। इसकी वजह से लोग खस्ता कचौड़ी के स्वाद के दीवाने हैं और वह रोजाना सुबह होने का इंतजार करते हैं।
कैसे तैयार होती है खस्ता कचौड़ी
हरिश्चंद्र गुप्ता ने बताया कि वे कचौड़ी बनाने के लिए सबसे पहले माध को मार कर रख लेते हैं। उसके बाद उसके छोटे-छोटे लोई साथियों में उड़द की दाल और टुकड़ों को मिलाकर पूरी तैयारी की गई पिट्ठी शामिल हो गई। पिट्ठी बनाने के बाद कचौड़ी को गोल बेल कर तैयार कर लिया जाता है और मसाले में पिट्ठी का तेल गर्म करके धीरे-धीरे डाला जाता है. 4 से 5 मिनट बाद सेंकने के बाद खस्ता कचौड़ी बनकर तैयार हो जाती है. यह खस्ता कचौड़ी के साथ आलू की बनी हुई झोल (आलू की सब्जी) और चटपटी चिप्स के शौकीनों को देते हैं।
कैसे तैयार होता है आलू का झोल और चिप्स
खस्ता कचौड़ी के साथ मिलने वाली चटनी और आलू के झोले को खास तरीके से तैयार किया जाता है. हरिश्चंद्र गुप्ता ने बताया कि आलू के झोले को तैयार करने के लिए आलू के झोले का उपयोग किया जाता है। सोयाबीन के बाद सॉसेज के साथ नि:शुल्क लिया जा सकता है। वहीं चटनी को तैयार करने के लिए भी हरी मिर्च, धनिया और अमचूर का प्रयोग किया जाता है. जो खस्ता कचौड़ी का स्वाद लेता है और भी खस्ता बनता है।
जानें खस्ता कचौड़ी का क्या रेट
हरिश्चंद्र गुप्ता ने बताया कि वह सुबह 8 बजे से लेकर रात 11 बजे तक खस्ता कचौड़ी को दिखाते हैं। इस दौरान उनके करीब 400 से 500 लोग खस्ता कचौड़ी का स्वाद लेने आए थे. वह एक पीस खस्ता कचौड़ी और सब्जी के शौकीनों को 15 मिनट में ही देखने लगती हैं।
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पहले प्रकाशित : 6 दिसंबर, 2023, 11:12 IST
