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नाम हब्शी, 123 साल पुरानी दुकान के हलवा का असली नाम जलवा, आपने बनाया है दारोमदार?


गौहर/दिल्ली: पुरानी दिल्ली में अपनी लजीज स्टाइल के लिए जानी जाती है। वहीं, नाज़ुक चौक की मशहूर मेघराज हलवाई की दुकान की मिठाइयां के तो लोग खासे दीवाने हैं। इस दुकान पर एक ऐसी खट्टी मिठाई भी है, जिसका नाम हब्शी हलवा है। इसे खाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। दुकान के मालिक राजवंश अरोड़ा ने बताया कि यह दुकान 1900 साल पुरानी है और अब 123 साल पुरानी है।

राजवंश अरोरा ने बताया कि यह हलवा विशेष रूप से पर्शिया और अन्य अरब देशों में काफी खाया जाता है। इस हलवे को हब्शी हलवा इसलिए कहा जाता है क्योंकि हमारे देश में अगर कोई भी शारीरिक रूप से काफी अधिक मात्रा में होता है तो उसे हम स्थानीय भाषा में हब्शी कहते हैं। इसका मतलब एक इंसान के पास घोड़ा जैसी ताकत है। उन्होंने बताया कि यह हलवा काफी मात्रा में खिलौनों के मिश्रण से बनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो भी इसे अपने जीवन में खाएगा, वह शारीरिक रूप से काफी मजबूत होगा। इस हलवे को बनाने के तरीके के बारे में शिष्य राजवंश ने बताया कि इस हलवे को दूध, देसी घी, जायफल, जावित्री, इलायची और सोंठ जैसी चीजों से तैयार किया जाता है. उन्होंने बताया कि इस हलवे को बनाने में करीब 3 से 4 घंटे का समय लगा है। इस हब्शी हलवे की कीमत 680 रुपये प्रति किलो है।

हब्शी हलवा के लोग दीवाने
करीब 50 साल से दुकान पर रह रहे ग्राहक द्वारका नाथ शर्मा ने बताया कि पूरी दिल्ली में पुरानी दुकान पर कोई काम नहीं करता। वहीं, ग्राहक पूना ने बताया कि कई सांझ से मिठाईयां ले रही हैं। आज तक उन्हें कभी पता नहीं चला कि किसी भी तरह का कोई उत्पाद है।

हब्शी हलवा कैसे बनाये
यह हलवा लेने के लिए आपको येलो मेट्रो लाइन से एडवेंचर चौक मेट्रो स्टेशन पर उतरना होगा। गेट नंबर 2 से बाहरी आकृतियाँ ही किसी भी पेंटिंग से लेकर मुजफ्फरनगरी मस्जिद के पास तक पहुँचें। यही पर आपको मेघराज हलवाई की दुकान मिलेगी। यह दुकान सप्ताह के सातों दिन खुली रहती है। आप यहां सुबह 8:00 बजे से लेकर रात 9:00 बजे तक कभी भी आ सकते हैं.

टैग: दिल्ली समाचार, खाना, भोजन 18



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