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पिता के साथ सड़क पर सब्जी की दुकानें थीं, बिना कोचिंग गए ऐसे बने जीएसटी इंस्पेक्टर


अनूप/कोरबाः विरोधाभासों के बावजूद भी मेहनत और लगन से सफलता हासिल करने की एक और ताजा मिसाल छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के सामने है। जहां बाजार में आलू और प्याज बेचने वाले युवाओं के पास एक समय कोचिंग जाने के लिए पैसे नहीं थे। तब उसने ऐसे समय में घर पर ही पढ़ाई कर सफलता हासिल की है। कोरबा जिले के आर्किटेक्चरल रेजिडेंट प्राइवेट लिमिटेड के हाल में ही वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) इंस्पेक्टर के पद पर चयन हुआ है।

गुप्ता ने जब सिविल सेवा की तैयारी करने का निर्णय लिया, तो उनके पास कोचिंग क्लास के लिए पैसे नहीं थे। लेकिन स्केच ने कठिन परिस्थितियों के बीच अपने सपनों को नहीं गिराया और लक्ष्य को हासिल करने के लिए खूब मेहनत की। साज-सज्जा की मेहनत रंग लाई और आज भी फोटोग्राफर्स में सफल हो गए।

मूर्ति की मेहनत लाई रंग
आलू के पिता और भाई साप्ताहिक बाजार में विक्रेता आलू और प्याज बेचते हैं। फ़्रॉम के पिता का हाथ बटाने के लिए आलू और प्लास्टिक बाज़ार प्याज़ भी ले जाया गया था। पिता और भाई की मेहनत की परख और प्रेरणा के बाद उन्होंने सरकारी अधिकारी बनने का संकल्प लिया और जी जान की मेहनत पर पानी फिर गया।

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बचपन से ही पढ़ाई में तेजी आ गई थी, इसलिए पिता ने उन्हें कभी पढ़ाई नहीं छोड़ी। अंत में एस एस एस सी सीजीएल 2023 क्लियर कर ही लिया गया, जिसमें आल इंडिया 641 रैंक प्राप्त हुई, जीएसटी इंस्पेक्टर बन ही गया।

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