देसी आज़मी/मॉडल। देवभूमि उत्तराखंड में गिरता हुआ पारा लोगों को ज्वालामुखी की चोटी पर ले जाया जा रहा है। इसी बीच उत्तराखंड की राजधानी में ऐसे मरीज़ों तक पहुंच है, जो कोल्ड फीवर से चिंतित हैं। बुखार बुखार पर दवा लेना तो जारी है। लेकिन खांसी 1 सप्ताह और 15 दिन तक भी नहीं हो रही है। कफ सिरप भी बेकार हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि यह एंटेरोवायरस या सर्जवी संक्रमण के कारण हो रहा है। कुछ चीज़ों के साथ इसे बचाया जा सकता है।
उत्तराखंड के राजधानी अस्पताल के सरकारी अस्पताल दून मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉक्टर ओबैद ने जानकारी देते हुए कहा कि समुद्र के मौसम की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में सबसे ज्यादा बच्चों और बुजुर्गों का खसख्य रखना जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि खांसी, बुखार और जुखाम तो सामान्य फ्लू के मौसम में ही होते हैं। लेकिन, इस बार बुखार और बुखार के ठीक होने के 15 दिन बाद भी खांसी ठीक नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि इस साल 20 फीसदी ऐसे मामले टूट गए हैं।
ध्यान रखें डॉक्टर की ये बातें
डॉ. ओबैद ने बताया कि जो बुजुर्ग हैं और जो क्रॉनिक सिगरेट पीते हैं या जिन लोगों को मरे हुए हैं। उन्हें अन्य दिनों में परेशानी हो सकती है. उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी वैराइटी में चल रहे हैं, वे प्रोपर रहेंगे और सूखी हवा में आदि नहीं घूमेंगे। उन्होंने कहा कि समुद्र में आग जलाने वाले लोग स्टिक हैं तो उनके स्मारक से दूर रहना। इसके अलावा अंगीठी या आग को बंद कमरे में न जलाएं। ऐसा करने से उस व्यक्ति को बहुत परेशानी हो सकती है.
मित्र को सूची की आवश्यकता है
डॉ. ओबैद ने बताया कि कार्डियक डिजीज यानी दिल के मरीजों को भी समुद्र में खास सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 40 साल से ऊपर के लोगों में यह समस्या हो गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग भी आश्रम से हैं. धरती के मौसम में सांस लेने में परेशानी हो जाती है। इन दिनों हार्ट अटैक का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अपने इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत करने के लिए सही सामग्री लें और गर्म कपड़े खरीदें।
.
टैग: देहरादून समाचार, स्वास्थ्य लाभ, स्थानीय18, उत्तराखंड समाचार
पहले प्रकाशित : 8 दिसंबर, 2023, 14:36 IST
