‘लड़कियों को सेक्स की इच्छा पर नियंत्रण रखने की इच्छा’ वाले चर्च हाई कोर्ट के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अदालत को किसी भी मामले में वज्रपात देने से पहले अपनी निजी राय/उपदेश देने से बचना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय की टिप्पणी बेहद क्रूर और गैर जरूरी है।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह अनुच्छेद 21 मूल अधिकारों का हनन है। कोर्ट ने वकील माधवी दीवान को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि वह अदालत के फैसले के खिलाफ क्या अपील करना चाहती है। वकील सरकार से निर्देश लेकर कोर्ट को सहमत करेंगे।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में दिए गए फैसले में कहा था कि ‘लड़कियों को… अपनी इच्छा को भौतिकवाद में रखना चाहिए और 2 मिनट के आनंद पर ध्यान नहीं देना चाहिए।’ इसके साथ ही कोर्ट ने लड़कियों को भी चित्रा दी थी कि उन्हें भी लड़कियों की गरिमा का सम्मान देना चाहिए।
अदालत ने लड़की के साथ यौन संबंध बनाने के बयान के बाद नाबालिग लड़के पर भी पॉक्सो के आरोप से दुष्कर्म किया था।
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पहले प्रकाशित : 8 दिसंबर, 2023, 15:15 IST
