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सिर्फ 21 दिन करें इस उपाय के रस का सेवन…नपुंसकता होगी दूर, पीना और पीना भी जरूरी


आशीष कुमार/पश्चिम चंपारण. ‘सत्यानाशी’ एक ऐसा शब्द है, जिसे देखकर हैरान दिमाग में सब कुछ नाश करने वाले की छवि उभरती है। अक्सर इस शब्द का प्रयोग नकारात्मक संदर्भ में किया जाता है। लेकिन, क्या आपको पता है कि इस नाम का एक पौधा पुरुषों के लिए अलंकरण माना जाता है। जी हाँ ! असली आयुर्वेद की दुनिया में असंख्य औषधीय औषधि का ज़िक्र है। मानव द्वारा हर मौसम में उपयोग किए जाने वाले पदार्थ का उपयोग किया जा सकता है। दस्तावेज़ में से एक है सत्यानाशी. इस औषधि का उपयोग मृदुता, मधुमेह, पेलिया, पेट का दर्द, खांसी और यूरिन की समस्या के लिए किया जाता है जिसमें अदरक का नशा शामिल है।

तोड़ने पर तैयार है पीले रंग का दूध

आयुर्वेदाचार्य भुवनेश पैंडेज़ की माने तो, मुख्य रूप से यह पौधा हिमालयी क्षेत्र में पाया जाता है, लेकिन दूसरे भारत में वृक्षों के किनारे के शुष्क क्षेत्रों में भी यह देखा जाता है। इस उपाय पर केंट अधिक होते हैं और इसके फूल पीले रंग के होते हैं। फूलों के अंदर श्यामले रंग के बीज होते हैं। सत्यानाशी को गोल्डनक्षीरी नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि डायमंड ब्रेकर पर पीले रंग का दूधिया नाम है।

इसमें एंटीमाइक्रोबियल, एंटी-डायबिटिक, एनाल्जेसिक, एंटीइन्फ्लेमेटरी, एंटीस्पास्मोडिक और कैप्सूल जैसे कई गुणकारी तत्व पाए जाते हैं। आयुर्वेद में इसके प्रयोग के बारे में बताया गया है। जिसमें सत्यानाशी का दूध, पत्ते के रस, बीज के तेल, रेनटिन का लेप जैसे कई अन्य जिंक का उपयोग किया जा सकता है।

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खांसी में असरदार

आयुर्वेदाचार्य कहते हैं कि सत्यानाशी का पौधा पुरानी से पुरानी खांसी को दूर करने में सफल होता है। इसके लिए इस आयुर्वेदिक उपाय को पानी में डुबोकर रखें, सुबह-शाम पीएं। कुछ ही दिनों में आपको खांसी से बाहर मिल जाएगा।

यूरीन प्रोब्लम

किसी व्यक्ति को अगर पेशाब में यूरिन से रिलेटेड मसाला जैसे की जलन आदि हो, तो ऐसे व्यक्ति को सत्यानाशी के उपचार का काढ़ा देना चाहिए। इसके सेवन से जल्द ही यूरिन से संबंधित परेशानी दूर हो जाती है।

दूसरे में बर्बाद

सत्यानाशी का पौधा ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने का काम करता है। इसके लिए आप इस रिटेलर का उपयोग कर सकते हैं।

नपुंसकता में नाव

नपुंसक कई लक्षण से हो सकता है. जिसमें डॉक्टरों की कमी का सबसे मुख्य कारण बताया गया है। भुवनेश के अनुसार, सत्यानाशी में वैज्ञानिकों की संख्या में वृद्धि का गुण होता है। इसलिए यदि आप मसालों की कमी के कारण निःसंतान हैं, तो इसका उपयोग आपके लिए हानिकारक है। इसके लगातार सेवन से 21 दिनों में नपुंसकता समाप्त हो सकती है।

त्वचा को निखारने के लिए

सत्यानाशी के उपचारों में एंटी-साइंटिएंट गुण पाए जाते हैं, जिससे त्वचा पर भी जो भी उत्पाद से संबंधित होते हैं, वे अनारक्षित होते हैं।

पीलिया में सहयोगी

पीलिया जैसी खतरनाक बीमारी के लिए भी सत्यानाशी का पौधा रामबाण का इलाज है। अगर किसी व्यक्ति को पीलिया हो गया है तो उसे सत्यानाशी के तेल में गिलोय का रस मिलाकर सेवन करना चाहिए। इससे पीरिया जड़वत से समाप्त हो जाता है।

(ध्यान दें – इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना न करें, नहीं तो दुष्परिणाम हो सकता है)

टैग: बिहार के समाचार, मधुमेह, स्वास्थ्य समाचार, ज़िंदगी, स्थानीय18



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