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आर्टिकल 370 सुप्रीम कोर्ट का फैसला: ‘अनुच्छेद 370 ईसाई गणराज्य..’ जम्मू-कश्मीर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला


नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में एनोटेशन 370 को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। प्रधान न्यायाधीश देवी चंद्रचूड़ ने सुनाते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर को भारत में शामिल करने के बाद संप्रभुता का तत्व शेखी नहीं रखा जाएगा।

प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की लोधी वाली पांच जजों की इस संविधान पीठ में जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस सूर्यकांत हैं। सीजे चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस मामले में तीन अलग-अलग जजमेंट लिखे गए थे, लेकिन सभी जज एक ही नतीजे पर सहमत थे।

सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2018 में जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन के समर्थकों के फैसले को खारिज कर दिया, क्योंकि इसे विशेष रूप से चुनौती नहीं दी गई थी। सीजे चंद्रचूड़ ने कहा, ‘जब राष्ट्रपति शासन लागू होता है तो राज्यों में संघ की शक्तियां खत्म हो जाती हैं। अनुच्छेद 356 के अंतर्गत शक्ति के प्रयोग का उद्घोष के साथ संबंध होना चाहिए। ‘राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य की ओर से संघ द्वारा दिए गए हर फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती… इससे राज्य का प्रशासन बंद हो जाएगा…’

प्रधान न्यायाधीश ने इसके साथ ही कहा कि संसद के पास कानून बनाने की शक्तियां केवल तभी संभव हैं जब राष्ट्रपति शासन लागू हो।

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बता दें कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेष रूप से विभाजित करने वाले संविधान के विवरण 370 को समाप्त कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और समुदाय में विभाजित कर दिया था। सरकार के इस जजमेंट के सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिनों की सुनवाई के बाद 5 सितंबर को मामले में अपनी याचिकाओं को चुनौती देते हुए अपना निर्णय सुनिश्चित रखा था।

शीर्ष अदालत ने अभियोजक जनरल आर वेंकटरामनी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वृद्ध किशोर ऐश साल्वे, राकेश दुबे, वी गिरि और केंद्र की ओर से 370 को दंडित करने वालों और केंद्र की ओर से सुनवाई के दौरान सुनवाई की थी। वहीं केंद्र सरकार के इस फैसले में गुटों की ओर से कपिल सिब्बल, गोपाल सुब्रमण्यम, राजीव ग्राहम, जफर शाह, डेंटल डेव और अन्य युवा वैल्युएबल ने बहस की थी। (भाषा इंजीनियरिंग के साथ)

टैग: अनुच्छेद 370, जम्मू कश्मीर, सुप्रीम कोर्ट



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