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जुगाड़ू आईडिया! भाईसाहब ये पेड़ चाय नहीं बल्कि मोटर-फिरती दुकान की है, स्वाद भी है मजबूत


विशाल कुमार/छपरा. चाय ओलम्पिक के आप कई तरह से देखेंगे। दोस्तों को सलाह देने के लिए कुछ न कुछ प्रयोग करते रहते हैं। इन दिनों चोपड़ा की पुतलियों पर भी चाय वाले की जुगाड़ू आइडियाज को देखने वाले लोग हररात में पड़ जाते हैं। देखने के लिए लोग खींचे चले आते हैं और बच्चे के हाथ से चाय भी बनाते हैं। पिपरा शहर के कटहरी बाग से लेकर पिक्चर सदर अस्पताल के बीच में घूमते-घूमते लोग को मंदिर वाली चाय पिलाते हैं। वहीं, शाम के समय डाक बंगले रोड पर दाऊद होटल के सामने स्टॉल स्टॉक पर चाय की बिक्री होती है।

स्तूप ने बताया कि वह 8वीं पास है और गरीब परिवार से आया है। चाय की दुकान के लिए सामान की जरूरत थी. उद्यम की कमी में घूम-घूम कर ही चाय बेचने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि लोगों को कैसे अपनी ओर आकर्षित किया जाए इसके लिए जुगाड़ की तलाश भी की जाए। इसके बाद मन में एक आइडिया पसंद आया तो इलेक्ट्रॉनिक तार और कप की मदद से केटली के चारो तरफ पेड़ बनाया गया, जो देखने में आकर्षक लग रहा था। लोग बाज़ार जाते हैं तो इस जुगाड़ को देखने के लिए जाते थे। अब जुगाड़ के साथ ना सिर्फ अलग पहचान मिली है बल्कि रोजाना करीब 100 कप चाय की सेल भी हो रही है।

5 रुपये में एक कप चाय
लैटर ने बताया कि लोगों को सिर्फ थीम का चाय पिलाते हैं। चाय पीने वालों की दुकान पर चॉकलेट का जुगाड़ू मेडिकल बहुत काम कर रहा है। लोग अनोखे पेड़ को देख रहे हैं तो आ ही रहे हैं, साथ ही चाय भी पी रहे हैं। स्लैट्स का यह जुगाड़ू मेडिकल चाय की बिक्री में बढ़ोतरी में मदद साबित हो रही है। लात ने बताया कि लोगों को पांच रुपये में एक कप लेप वाली चाय पिलाते हैं। इस अनोखे पेड़ को देखकर लोग चर्चा कर रहे हैं और चाय का चुस्की भी ले रहे हैं. लक्ष्मण ने बताया कि चाय बेचकर ही घर का खर्चा चलता है। पढ़ाई के बाद कोई नौकरी नहीं मिली तो पिछले दो साल से चाय की दुकान ही काम कर रहे हैं। रोज़ होने वाली किताब से परिवार का किसी तरह का गुजरात-बेसर हो जाता है।

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