उत्तर
अमचूर को हृदय के लिए भी अत्यधिक गुणकारी माना जाता है।
यह मसाला आंखों को मोतियाबिंद से बचने में भी मददगार हैं।
अमचूर पाउडर के फायदे: भारत में बिना मसाले का खाना ‘अधूरा और नीरस’ है। विशेष बात यह है कि प्रकृति ने भारत में तीन और नमूने पैदा किये हैं, जो इन देशों में रहते हैं और पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। दोस्तों में एक मसाला अमचूर (सूखा आम पाउडर) भी है. इस भोजन में अलग तरह का बेजोड़ आटा स्वाद तो भरता ही है, उसे सुरक्षित (हानिरहित) भी बनाता है। यह डॉक्स सिस्टम में सुधार करता है और शरीर से विषाक्तता (डिटॉक्सिफिकेशन) को भी बाहर निकालता है। खाद्य पदार्थ इस मौलिक को शरीर के लिए बेहद गुणकारी मानते हैं।
अमचूर को स्पेशल मसाला (मसाला) माना जाता है। उसका कारण यह है कि यह कालीमिर्च, दालचीनी, इलायची की तरह सीधे तौर पर प्रकृति प्रदत्त नहीं है। इसे तैयार किया गया है. एग्मार्क लैब के संस्थापक निदेशक जीवन सिंह प्रुथी की पुस्तक ‘स्पाइसेस एंड कॉन्डिमेंट्स’ में बताया गया है कि पुराने समय में जब तूफान आता था तो कच्चे आम को सुखाकर ले जाते थे तो किसान उन्हें छील-काटकर उन पर हल्दी पकड़ अपनी सुखा देते थे और जब उन्हें भोजन करते थे के लिए प्राचीन संग्रहालय की जरूरत थी तो इसे पीसकर इस्तेमाल कर लिया गया था। आज भी अमचूर सिरप को ऐसे ही तैयार किया जा रहा है। लेखक के अनुसार यह मसाला पोषक तत्वों से परिपूर्ण है। कम कैलोरी में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, कैरोटीन, विटामिन बी2, विटामिन सी और साइट्रिक एसिड काफी मात्रा में पाया जाता है।
अमचूर के विशेष गुण कर दंग रह गए
1. डॉक्स सिस्टम को सही तरीके से रखने के लिए अमचूर को बेहतर माना जाता है। मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व डीन व वैद्यराज दीनानाथ उपाध्याय का कहना है कि यह मसाला क्षमता से भरपूर है और आयुर्वेद में भी इसका विशेष वर्गीकरण है। इसका सेवन सामान्य मात्रा में ही किया जाना चाहिए, जबकि यह शरीर को लाभ पहुंचाएगा। यह पाचन शक्ति को पुनःप्राप्त करता है। यदि पाचन तंत्र संयंत्र है तो इसका उपयोग भी ठीक कर देगा। असल में पाया गया इसमें जाने वाला विशेष प्रकार का कटापन और भूखा पाचन तंत्र को बनाए रखने में भूमिका अदा करते हैं। इसका लाभ यह भी रहता है कि आपका वजन भी नियंत्रित रहता है। एक विशेष बात यह भी है कि अमचूर में विटामिन सी भी पाया जाता है, जो शरीर में वसा को तोड़ने का काम करता है। यही वज़न का कारण बनता है. दूसरी ओर स्वास्थ्य से जुड़े अमेरिकी संगठन बॅाचॅटी (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) ने यह भी माना है कि आम आदमी के वजन को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
2.अमचूर शरीर से तो विष दूर करता है, साथ ही भोजन को भी विषाणु से सिखाता है। इसमें पाए जाने वाला कट्टापन (साइट्रिक एसिड) अलग-अलग प्रकार का होता है जो किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ में नहीं पाया जाता है। असल में कच्चे आम में विटामिन और चिप्स की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है, जो परिष्कृत आम में पाए जाते हैं। यही ग्रुप बॉडी से ऑर्गनाइजेशन में मदद करता है और शरीर को विषाणुओं से मुक्त कराता है। यह पेट को रोगों से मुक्त रखने में भी शामिल है। विशेष बात यह है कि अमचूर का यही गुण भोजन को भी हाईजीन कर विष्णुमुक्त कर देता है। अचार में इसे अंतिम रूप से डाला जाता है और लंबे समय तक बचाए रखने के लिए छोटे मांस और चिप्स को प्रयोग में लाया जाता है।
3. ऐसा भी माना जाता है कि अमचूर शरीर में मौजूद भारी वसा लगातार खराब रहता है, इसलिए इसे हृदय के लिए भी गुणकारी माना जाता है। अगर शरीर में भारी वसा का स्थिरीकरण होता रहेगा तो रक्त की मात्रा का भी खतरा बना रहेगा। अगर ब्लड उपकरणों को कंट्रोल में करना चाहते हैं तो अमचूर को एक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। अमचूर में एंटीहाइपर लिपिडेमिक (एंटीहाइपरलिपिडेमिक) नामक यौगिक भी पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में सहायक होता है। यह ट्राइग्लिसराइड्स (ट्राइग्लिसराइड्स) भी शामिल है जो शरीर में मोटापा बढ़ाने का कारक है। इसका लाभ यह भी रहता है कि शरीर की धमनियां भी बनी रहती हैं, जो सीधे तौर पर हृदय के काम से जुड़ी होती हैं।
4. अमचूर को आंखों के लिए भी गुणकारी माना जाता है। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर को तो स्वस्थ रखते हैं, साथ ही आंखों को मोतियाबिंद से बचने में भी मदद करते हैं। इसमें आयरन भी पाया जाता है, इसलिए इसका नियमित सेवन ब्लडअल्पता यानि कि पाउडर से भी बचाव करता है। अमचूर में विटामिन सी की भी पर्याप्त मात्रा होती है, यह स्कर्वी रोग से जुड़ा होता है, जो जोड़ों और घटकों और रक्तवाहिनियों को नुकसान पहुंचाता है। त्वचा के लिए भी यह माना जाता है। इसमें पाए जाने वाली कम कैलोरी भी शरीर का फिटनेस बनाए रखती है।
अमचूर का इतिहास ओर यात्रा
अमचूर का ‘अविष्कार’ भारत में ही माना जाता है। शाकाहारी इतिहासकारों का मानना है कि यह मसाला आम से ही निकला है और आम की उत्पत्ति सबसे पहले भारत में हुई थी, इसलिए यह और भी विशेष मसाला आम से ही निकला है। जीवन सिंह प्रुथी के दक्षिण भारत में जिस प्रकार हजारों वर्षों से भोजन में इमली का प्रयोग हो रहा है, उसी प्रकार उत्तर भारत में भी इमली का प्रयोग लाया जा रहा है। यह भारतीय कलाकारी अन्य कलाकृतियों की तरह ही पूरी दुनिया में डिजाइन की गई है और इसका एक्सपोर्ट भी किया जा रहा है। अमचूर का बहुत अधिक उपयोग होता है। भारत में दाल से जुड़े चॉकलेट व ड्राई प्लास्टर व पकौड़े का उपयोग काफी मात्रा में होता है।
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पहले प्रकाशित : 13 दिसंबर, 2023, 15:20 IST
