अनूप/कोरबाः छत्तीसगढ़ में हाथी की मौत का सिलसिला नहीं रुक रहा है, एक बार फिर हाथी की मौत को वन विभाग के अधिकारियों ने लूट लिया है। हाथी की मौत की घटना जिले में हुई है, जहां खेत की रखवाली के लिए खेत में करंट वाले तार बिछाए गए थे। इसके परिणामस्वरूप, हाथी दांत में एने से मर्ज हो गया है। घटना की जानकारी पर, वन विभाग की टीम तत्परता से निरीक्षण कर रही है और घटना की जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार, राजपुर वन परिक्षेत्र में हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इस बीच, नरसिंहपुर गांव में रकवाली के खेत में लगाए गए करंट की चपेट में आने से एक नर हाथी की मौत हो गई। सुबह मृत हाथी की खोज पर जानकारी दी गई, जिसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई। वन अधिकारी तत्परता से मुद्दा बना रहे हैं और बातचीत का आयोजन कर रहे हैं। मृत नर हाथी की उम्र लगभग 8 से 10 वर्ष के आंकड़ों के अनुसार है। उप वनमंडल के अधिकारी आरएस श्रीवास्त ने बताया कि वन विभाग के भवन की तैयारी में है और मामले में दोषी किसान पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।
हाथियों की मौत के आंकड़े
पिछले दिनों कोरबा कटघोरा वन मंडल में हाई ट्रस्ट तार की पाली में एक हाथी की जान चली गई थी। इस मामले में, वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9 और धारा 39 के तहत विद्युत विभाग के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया था। साथ ही, अन्य आस्थगित में भी हाथियों की मौत के मामले सामने आए हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के बनने के बाद कुछ राज्य के सरगुजा, जशपुर, रायगढ़ और कोरबा में ही हाथी रहते थे। मानव-हाथी दंड के कुछ मामले इन जिलों से सीमित थे। हाथियों के साथ संघर्ष का स्वरूप इन चार ज़िलों से बढ़ते हुए राज्य के अधिकांश ज़िलों तक पहुंच गया है। वन विभाग के अनुसार, सितम्बर 2002 में राज्य में केवल 32 हाथी थे, जिनमें वृद्धि हुई और 2007 में यह आंकड़ा 122 तक पहुँच गया। 2017 में यह संख्या 247 हो गई थी और 2023 में छत्तीसगढ़ में कम से कम 450 हाथी हाथी रूप से रह रहे हैं।
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पहले प्रकाशित : 13 दिसंबर, 2023, 15:54 IST
