वर्ष 2019 पाठक/अलवर. पूर्वी प्रदेश की शुरुआत हो चुकी है। इसके साथ ही लोग हॉट तासीर की नीरस का रुख करने लगते हैं। गर्म तासीर का नाम आते ही लोगों का ध्यान सबसे पहले मूंगफली के नाम पर जाता है। जो कि इन दिनों शहर में जगह-जगह नजर आ रही है। प्रवासी लोग दूसरे कोच से पिज्जा शहर में ठेले, रोड पर दरिया पकड़ के बीच रह रहे हैं। उत्तरपूर्वी शहर में मूंगफली कई जगहों से आती है। लेकिन जंगल की शुरुआत के साथ ही मुंगफलियां चोमू और जोधपुर से आना शुरू हो गया है। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य राज्यों से भी मूंगफली आती है।
रिवायत शहर के जेल में मुंगफलियों की आवक शुरू हो गई है। इसे गरीबों का मेवा भी कहा जाता है. अमेरीका शहर में कई जगहों पर ग्राहकों की दुकानें मौजूद हैं। शुरुआत में यूरोपियन जोधपुर और चोमू से आती है। इसके बाद जैसे-जैसे मूंगफली की मोटाई होती है, तो मूंगफली की आवक भी मोटाई होती है। रोहित ने बताया कि अलवर में अलग-अलग जगह से मूंगफली मिलती है। जिसमें दोसा, जोधपुर, चोमू व गुजरात शामिल है। इस समय मुआवज़ा की डिक्री काफी अच्छी चल रही है। इसकी कीमत के बारे में रोहित ने बताया कि इसकी कीमत कहां से शुरू होती है 80 किलो से. तो अभी खाते की कीमत 130 रुपये से लेकर 170 रुपये किलो तक चल रही है। आई.एस. सीज़न अक्टूबर से लेकर फरवरी तक होता है। जहां कई लोग इस व्यवसाय को अपना कर अन्य स्थानों पर विक्रेता की दुकान के औज़ार हैं। इसका मतलब यह है कि ये सभी चीजें बाजार में उपलब्ध हैं।
यूपी के बिजनेस सबसे ज्यादा हैं
अब लोगों के लिए एक जीवन यापन का मध्य भाग भी बन गया है। इसमें सर्वाधिक लोग उत्तर प्रदेश राज्य के हैं। जहां पर तरबूज़, फ़्राईच, फ़्राईच, ग़ुलाम, संभल, बलिया, झील के लोग पिछले कई वर्षों से पिपरियात ज़िलों में गेंहूं मूंगफली ला रहे हैं। अब उनकी जगह भी पहले से ही सुरक्षित है। जहां वह हर साल मूंगफली की दुकानें हैं। मूंगफली वाले रोहित ने बताया कि दुकान पर सबसे ज्यादा मूंगफली की बनी होती है। इसका कारण यह है कि लोग एक साथ मूंगफली लेकर जाते हैं और अपने घर पर उन्हें सेक कर लेते हैं। हालाँकि, अधिशेष पर आधारित मूँगफली का स्वाद अलग ही लगता है।
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पहले प्रकाशित : 13 दिसंबर, 2023, 18:30 IST
