निखिल कौशिक/सहारनपुर: पुराने शहर में स्थित रायवाला मार्केट के करीब 20 साल पहले एक छोटी सी रेहड़ी पर खस्ता चावल छोले का स्वाद लेने के लिए ग्राहक दूर-दूर से आते हैं। इसमें खास बात ये है कि इस रेहड़ी पर बिकने वाले व्यंजन का 20 साल का स्वाद आज भी पहले जैसा है. रेहड़ी पर आज भी खस्ता चावल छोले को एक पत्तल में बनाकर दिया जाता है. ग्राहक भी यहां के खस्ता चावल छोले के स्वाद को पसंद करते हैं. 20 सेकेण्ड के बाद भी ग्रहों को एक स्वाद मिलन से इस रेहड़ी पर हमेशा भीड़ लगी रहती है।
रेहड़ी बाजार में रेहड़ी लगाने वाले रमेश ने बताया कि करीब 20 सागर से एक ही जगह पर रेहड़ी पर लगे खस्ता, छोटे चावल वाले लोग लोगों को दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि सबसे पहले उनके चाचा ने ही इस व्यंजन बनाने का काम शुरू किया था. चाचा द्वारा बनाए गए खस्ता छोले चावल का स्वाद लोगों को काफी पसंद आया और यह रेहड़ी शहर ही नहीं बल्कि देहात क्षेत्र में भी खस्ता छोले चावल के लिए मशहूर हो गया। रमेश ने बताया कि चाचा की मौत के बाद इस रेडी पर उन्होंने भी ऐसा ही काम जारी किया है और आज भी ऑनलाइन अपने मनपसंद व्यंजन खाने को मिल रहे हैं।
पत्तल पर आमते हैं खस्ता छोले चावल
रेडी बिल्डर राकेश ने बताया कि उनके चाचा ने किसी भी स्थान पर खस्ता छोटे चावल को लेकर न किसी व्यवसाय को पटाल पर भोजने की विधि अपनाई थी। उसी परंपरा के अनुसार आज भी इस रेहड़ी पर व्यंजन पत्तल पर ही बनाया जाता है। रमेश ने बताया कि खस्ता छोले चावल बनाने का कोई अलग तरीका नहीं है, बल्कि सामान्य तरीके से ही घर पर इसके लिए अन्य आदि तैयार करके छोले बनाए जाते हैं. हर रोज़ रियावाला मार्केट में एक ही जगह पर शेयर किया जाता है, इस खाने के व्यंजन को मज़ाक बनाया जाता है। रमेश ने बताया कि इस रेहड़ी के शौकीन से उनके परिवार का भरण-पोषण बहुत अच्छा चल रहा है।
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पहले प्रकाशित : 13 दिसंबर, 2023, 11:44 IST
