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पाकिस्तान के दाल व्यंजनों को दिया हिंदुस्तानी तड़का, स्वाद ने राजस्थान में मचाया धूम, 50 साल पहले की थी शुरुआत


अर्थशास्त्र सेजू/बाडमेर। भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद सरहद के उस पार से इस पार ना केवल कई व्यंजन आए बल्कि कई व्यंजन भी भारत में आए। उन्ही रेसिपी में से एक है दाल डेस्टिनेशन. पाकिस्तान की दाल के व्यंजन बहुत छोटे होने के साथ-साथ चने की दाल के बने थे जबकि भारत में यह मूंग की दाल का धमाका है। पाकिस्तान की दाल डिश में हिंदुस्तानी तड़का लगाने की विधि लाखों लोगों की पसंद के अनुसार बनाई जाती है टीकमचंद खत्री के दाल डिश आज बड़े शहरों में भी चाव से बनाई जाती है। सलेमपुर शहर के इलोजी मार्केट में टीकमचंद खत्री की दुकान है।

50 साल पहले टीकमचंद खत्री ने 10 पैसे में कलाकारों को बाबा की शुरुआत की थी, जो आज 30 रुपए प्रति संप्रदाय के रूप में बिकता है। हिंदुस्थानी में दाल वाद्ययंत्रों के सामान्य टीकम हुए चांद खत्री ने कहा कि पाकिस्तान के सिंध के लोग इस व्यंजन को लेकर भारत आए थे, लेकिन वह बहुत छोटे और चने की दाल के पक्के हैं, जबकि उन्होंने इसे हिंदुस्तानी स्वरूप देते हुए वाद्ययंत्रों के आकार को बड़ा किया और चने। उन्होंने मूंग की दाल की जगह मूंग की दाल का इस्तेमाल किया.

आज दो मूर्तियों से विशाल मूर्तियाँ

78 साल के टीकमचंद ने अपने भूतकाल में कहा था कि उन्होंने पहली दुकान शुरू की थी, लेकिन अब जिले के अलग-अलग स्थानों पर दो दुकानों से बड़ी संख्या में लोग हैं। हालाँकि, पहले उनकी रोज़ाना 400 डिज़ायंट बिकती थीं, अब 100 से ज़्यादा की संख्या में अवशेष होने के कारण अब भी बहुत ज़्यादा बिक रहे हैं। इतनी ही नहीं टिकमचंद मूंग की दाल में सुखी मिर्ची की परत तीखी होती है जिससे दाल और स्वादिष्ट हो जाती है। टीकमचंद आबाद के अलावा जोधपुर, जयपुर, मैसूर, सूरत, जालौर, वापी, नवसारी समेत कई बड़े दूल्हे भी शादी ब्याह में पकवान बनाते हैं। लोग यहां से मशहूर बड़े शहरों में लेकर जाते हैं।

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