सिमरनजीत सिंह/शाहजहांपुर: अगर हम आपसे कहें कि इस दुकान पर कभी एक रुपये किलो जलेबी और एक रुपये किलो दही मिलता था तो आप चौंक जाएंगे। लेकिन ये बात बिल्कुल सही है क्योंकि हम आज से करीब 65 साल पहले बात कर रहे हैं. जब जलेबी घी में बनती थी और चीनी और मैदा भी सस्ता हो जाता था। क्रिसमस ट्री की जलेबी का स्वाद भी बदल गया, लेकिन बदला नहीं तो वो है शंकर जी की जलेबी का स्वाद। शंकर जी की जलेबी का स्वाद आज भी बरकरार है. ये दुकान अज़ामा के कटिया मोती निशात टॉकिज रोड पर है।
जलेबी बनाने वाले हरिश्चंद्र गुप्ता का कहना है कि जलेबी बनाने का काम उनका 65 साल पुराना है। वो उस दौर से जलेबी ड्रिंक का काम कर रहे हैं। जब चीनी 1 रुपए 50 प्रति किलो और मैदा 75 रुपए प्रति किलो मिलता था। उन दिनों जलेबी बनाने में मूंगफली और तिल के तेल के साथ-साथ घी का भी प्रयोग किया जाता था। उस समय गैस प्लांट नहीं बल्कि गैलरी की भट्टी से जलेबी बनाई गई थी।
सब कुछ बदला हुआ नहीं लेकिन बदला हुआ तो जलेबी का स्वाद
हरिश्चंद्र गुप्ता ने बताया कि किस दौर में विभिन्नताएं और विविधताएं बताई गईं। लेकिन उन्होंने जलेबी का स्वाद फिर भी बरक़रार रखा. इसके कारण लोग आज भी उनके हाथ से बनी जलेबी का स्वाद लेने के लिए इंतजार करते हैं। हरिश्चंद्र गुप्ता ने बताया कि जलेबी बनाने के लिए किसी भी तरह के रसायन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने जलेबी को बेहतर स्वाद देने के लिए 3 दिन पहले ही मैदा को नासाकर रख दिए थे और फिर शुद्ध रिफाइंड में जलेबी को तलने के बाद चीनी की चाशनी में डबकर जलेबी बनाकर तैयार कर लिए हैं. फिर ग्राहक द्वारा जलेबी कंसर्ट पर भरोसा दे रहे हैं।
3 घंटे में बिक जाती हैं सारी जलेबियाँ
हरिश्चंद्र गुप्ता का कहना है कि वह जलेबी का काम सुबह 8 बजे से लेकर रात 11 बजे तक करते हैं। इस दौरान उनके करीब 200 लोग रोजाना जलेबी खाने आते हैं। उनके यहां 120 रुपए प्रति किलो जलेबी और जलेबी के साथ नीचे दिए गए दही वाले भी 120 रुपए प्रति किलो ही दिए जाते हैं।
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पहले प्रकाशित : 14 दिसंबर, 2023, 15:55 IST
