दिल्ली/विद्यार्थीकैमूर. ठंड शुरू ही हुई है कि होटल से तिलकुट की सोंधी खुशबू आने लगी है। हालाँकि, मकर संक्रांति पर्व का समय आने वाला है, लेकिन मथुरा तिलकुट बनाने की तैयारी जारी कर दी गई है। बाजार में भी तिलकुट के अवशेष सजने लगे हैं। कुछ मैसाचुसेट्स प्रोग्राम से तिलकुट तैयार करवा रहे हैं तो कुछ तैयार तिलकुट को खरीदकर बिक्री कर रहे हैं। हालाँकि, कुछ ऐसे कलाकार भी हैं जो खुद तैयार कर तिलकुट बेचने का काम करते हैं। तिलकुट के कारोबार में सैकड़ों लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। वैसे तो तिलकुट की पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान है। हालाँकि, अब कैमूर के भभुआ में भी एक टिकट पर टिकट लग गया है।
गया के खस्ता तिलकुट के नाम और स्वाद से सभी परिचित हैं। इसी तरह के तिलकुट की शुभकामनाएँ भभुआ शहर में मिल रही हैं। ठंड शुरू होने से ही तिलकुट की बिक्री में वृद्धि हुई है। मकर संक्रांति से पहले ही तिलकुट बनाने वाले शिल्प पहुंच गए थे। शहर के समाहरणालय पथ, आश्रम पथ, पटेल चौक, नगर परिषद कार्यालय के आस-पास के तिलकुट की तस्वीरें देखी गई हैं और आगंतुकों का भी आगमन हुआ है। तिल गर्म होता है और इसे खाने से फ्लू का असर कम होता है। शहर के खादी भंडार गली में स्थित तिवारी तिलकुट भंडार का बड़ा नाम है। तिलकुट की सबसे ज्यादा सेल इसी दुकान से होती है।
प्रतिदिन 25 हजार की होती है सेल
मजदूर लक्की तिवारी ने बताया कि कई साल से तिलकुट की दुकान चला रहे हैं। मकर संक्रांति के समय ग्राहक तिलकुट की उन्नति रूझान संरचनाएं हैं। उन्होंने बताया कि कानपुर, पटना और स्थानीय बाजार से तिल मांगते हैं। वहीं, खोया भी भभुआ की मंडी में ही उपलब्ध होता है। उन्होंने बताया कि तिलकुट का सौदा दो से तीन महीने का होता है। इस 3 महीने की गर्लफ्रेंड में पूरे साल का खर्च बताया गया है। लक्खी तिवारी ने बताया कि तिलकुट के सीजन में रोजाना 25 हजार से ज्यादा की बिक्री होती है।
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पहले प्रकाशित : 16 दिसंबर, 2023, 20:27 IST
