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दवा की तरह ब्लड उपकरण में काम आती है रसोई में रखी ये चीज, डॉक्टर भी मानते हैं लोहा


रूपांशु चौधरी/हजारीबाग. इस मौसम में लोगों के रहन-सहन से लेकर स्वाद में बदलाव देखने को मिलते हैं। ऐसे में लोग बाहर मिलने वाले कई गर्म चीजों का सेवन करना शुरू कर देते हैं। इन सब में अवैध की तासीर गर्म होती है।जिस कारण से लोगों को काफी फायदा मिलता है। लेकिन हमारे किचन में उपलब्ध गुड भी कमरे में काफी जादुई होता है।

पूरे हिस्से के ग्रामीण क्षेत्र में गुड़ की व्यापक रूप से निर्मित किया गया है। साथ ही बड़कागांव क्षेत्र का गुड पूरे देश भर में प्रसिद्ध है। इस संबंध में पिपरियात गोला रोड महेश सोनी चौक पर स्टिथ प्लास्टिक आयुर्वेद के डॉक्टर वकील उपाध्याय ने कहा है कि झारखंड के तिमिर क्षेत्र में पाए जाने वाले गुड यहां के लोगों के लिए आभूषण से कम नहीं है। गुड़ में आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, पोटेशियम और विटामिन-सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। ठंड के समय गुड़ का सेवन करने से ठंड का असर कम होने में मदद मिलती है।

क्या कहते हैं बस्तियाँ
डॉ. के शिष्य के शिष्य आगे कहते हैं कि गुड़ की तासीर काफी गर्म होती है, जिस कारण से गुड़ का सेवन करने से हमारे आस-पास भी कोई आश्चर्य नहीं होता है। गुड़ अच्छा है हमारे शरीर के अंदर से काफी गर्म होता है। भूखा है. अंत, नाक और भोजन नली को अंदर से डिटॉक्स करके प्रभावित किया जाता है। साथ ही ब्लड वर्कशॉप से ​​​​के-साथ में ये बैलेंस बना रहता है।

ऐसे करें सेवन
उन्होंने बताया कि बड़कागांव क्षेत्र में गुड़ बनाने वाले का भी प्रयोग किया जाता है जो गले की खराश के लिए काफी खतरनाक होता है। इसका सेवन करने के लिए लोग रोजाना 50 ग्राम गुड खा सकते हैं। साथ ही चाय का उपयोग चीनी के स्थान पर भी किया जा सकता है। गुड़ से बने मुर्गे का उपयोग भी काफी अद्भुत साबित होता है।

टैग: स्वास्थ्य सुझाव, स्थानीय18



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