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दोस्त ने दिया धोखा…लैटिन ने रखी हमारी मदद, फिर खड़ा किया 10 लाख का बिजनेस


रीते कुमार/समस्तीपुर. ठंड का मौसम आते ही चाय के साथ बिस्कुट की डिज़ाइन बढ़ती है। ऐसे में हर सुबह लोग जब चाय लेते हैं तो बिस्किट का स्वाद जरूर चखते हैं। अगर आप भी बिस्किट खाने के शौकीन हैं और थोक में खरीदना चाहते हैं, तो डरने की बात नहीं है। क्योंकि जिले के कल्याणपुर में पिछले 15 वर्षों से प्रशांत बेकरी का व्यवसाय चल रहा है। करीब 10 से 12 वैरायटी के बिस्किट बन रहे हैं। जिसका स्वाद काफी टेस्टी होता है. क्योंकि आम तौर पर प्लास्टिक में आप जब बिस्किट दिशानिर्देश होते हैं तो वहां अधिक बांध होते हैं। ऐसे में यहां पर आपको ऑफलाइन पर बिस्कुट उपलब्ध हो जाएंगे। यहां बादामी, जीरा, नारियल, मंगरैला, बर्गर रोटी, पाव भाजी रोटी, रस, बाकरखानी, शकरपारा, पापड़ी और अन्य प्रकार के बिस्कुट बनाए जाते हैं।

पैसिफिक के पिता को एक मित्र के माध्यम से बिक्री व्यवसाय का सुपरमार्केट मिला था। लेकिन उनके पिता को कोई दिक्कत नहीं हुई, क्योंकि उनके दोस्त ने बिजनेस बंद कर दिया। आईडी का समय होने के कारण और ईसाइयत को पैसा न मिलने से मजदूर काफी निराश थे। मजदूर ने प्रशांत के पिता से कहा कि अगर यह बेकरी का बिजनेस बंद हो गया तो हम लोगों के परिवार पर मुसीबत आ जाएगी। आईडी का समय ऐसे होता है जब आप हम लोगों की हेल्प करते हैं। हम लोग ये बिजनेस चलाएंगे. हम लोगों को 2 महीने का समय मिलता है. अगर बिजनेस अच्छा नहीं चला तो आप बंद कर देंगे। प्रशांत के पिता ने मजदूर की बात मान ली और बिजनेस फिर से शुरू किया। धीरे-धीरे प्रशांत के पिता के बिजनेस का आकलन करने लगे तो बेनिट पता चल गया। इसके बाद से बिजनेस स्थिर रहा।

नई तकनीक का सहारा लिया गया
बातचीत के दौरान प्रशांत कुमार ने बताया कि जिस वक्त वक्ती बेकरी का बिजनेस शुरू हुआ था, उसी दौरान भट्टी पर बिस्कुट बन गए थे। लेकिन नई-नई तकनीकें आ गई हैं, अब हम लोग मशीनों को छोड़कर चले गए हैं। जिसमें सारा काम मशीन से ही होता है. हालाँकि, जो मजदूर मेरे साथ शुरू हुआ, वह मजदूर आज भी जुड़ा हुआ है। उनकी सहायता से हमारा यह बेकरी का बिजनेस चल रहा है। शुरुआती दौर में तो कम सेलिंग थी, लेकिन अब करीब 15 से 20 हजार की रोजाना सेलिंग हो रही है। जिसमें करीब 20% खर्चा कट कर दिखाया जाता है। महीने की बात करें तो महीने का करीब 90 हजार रुपए तक का इनकम हो जाता है।

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