सौरभ तिवारी/बिलासपुरः आज के समय में लोगों की लाइफस्टाइल कुछ ऐसी हो गई है, कि हम ज्यादातर बाहरी खान पान पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। फ़ायर फ़ास्ट फ़ायर हो या फिर ढेबा का ज़ार खाना, हम सब बाहर के दुकानदारों का मज़ा लेते हैं। लेकिन अगर ध्यान न दिया जाए तो यही मजा कभी सजा में बदल जाता है। अधिकांश बाहरी और तेल मसाला विक्रेताओं से साइबेरियाई नाम की बीमारी का शिकार भी हो सकता है जो कि लंबे समय तक चलने वाले तूफान में घातक साबित हो सकता है। लाइफ स्टाइल से जुड़ी इस बीमारी को लेकर हमने चर्चा की शुरुआत और गेस्ट्रो स्पेशलिस्ट डॉक्टर मैगज़ीन सिंह से इस बीमारी से बचने के उपायों के बारे में विस्तार से बताया।
इस बीमारी में सूजन आ जाती है, जिससे पूरे शरीर को नुकसान पहुंचता है। यदि समय रहते इसका उपचार नहीं जाना जाता तो यह बीमारी भी हो सकती है। बिलासपुर की बात करें तो इन दिनों जिला अस्पताल में दिन भर में लगभग 10 मरीज हर मरीज से पीड़ित पाए जा रहे हैं।
क्या कारण है ?
लाइफस्टाइल स्टाइल और खान पान इस बीमारी की प्रमुख वजह है। अनहाइजेनिक भोजन, अधिक तेल मसाला, डालडा से बना खाना, बाहरी खान पान, विकार न होना, नींद ठीक से पूरा न होना और शराब का सेवन कम मात्रा में होना का कारण होते हैं।
कैसे पहचानें?
वर्गीकरण का कोई खास प्रारंभिक लक्षण नहीं होता है। यह बीमारी जब बहुत बढ़ती है, तब लक्षण सामने आते हैं। लेकिन जांच के द्वारा इसका पता लगाया जा सकता है। वहीं भूख कम लगना, वजन बढ़ना, आंखों का रंग पीला होना, पैरों में सूजन होना, पूरे समय थकान रहना आदि लक्षण हो सकते हैं।
इससे कैसे बचें?
पोर्टफोलियो से रिज़ॉर्ट का सबसे सस्ता तरीका है, अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव लाना। बाहरी भोजन को अवॉइड करना होगा। डालडा और पुराने तेल में खाद्य पदार्थों से अव्यवस्थित। हरी जड़ी-बूटियाँ और फल, अधिकांश तेल मसाला खाने से, स्वास्थ्यवर्धक पदार्थ लें, उपभोक्ता करें। लाइफ़स्टाइल में चेंजिंग शेल्फ़ पर आप शोरूम से बेच सकते हैं।
(नोटः यहां दी गई जानकारी सिर्फ प्रोटोटाइप और गेस्ट्रो स्पेशलिस्ट डॉ. सिंह से बातचीत पर आधारित है। यहां दिए गए तथ्यों की न्यूज 18 पुष्टि नहीं करती है।)
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पहले प्रकाशित : 19 दिसंबर, 2023, 12:57 IST
