मंगला तिवारी/मिर्जापुर : पूरे उत्तर भारत में इन दिनों ठंड बढ़ गई है। उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के पहाड़ों पर हो रही तटीय क्षेत्र से लेकर समुद्र तक का तापमान गिरता है। दिल्ली- पूरे उत्तर भारत में इन पहाड़ों से चलने वाली तेज बर्फीली पहाड़ियों के कारण यहां के लोगों का ठिठुरन का सामना करना पड़ रहा है। एशिया के मौसम में कई सारी बीमारियां भी तेजी से पैर पसारने लगती हैं। खासतौर पर छोटे बच्चों में खांसी, बुखार, सर्दी, निमोनिया समेत अन्य प्रकार के मामले काफी ज्यादा देखने को मिलते हैं।
अगर समय रहते इन फिल्मों के चमत्कार पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति काफी गंभीर हो सकती है। इनमें से सबसे अधिक बच्चों को निमोनिया से नुकसान पहुंचता है। देश में हर साल कई बच्चे पीड़ित होते हैं। वहीं, समय पर इलाज न होने से कई बच्चों की मौत भी हो जाती है। ऐसे में यह जरूरी है कि निमोनिया के शुरुआती इंजेक्शन को डॉक्टर के पास से पहचानकर तत्काल प्लास्टिक के सामान के साथ ले जाना चाहिए।
समय से इलाज जरूरी है
मंडलीय मंडली के वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉक्टर देवराज यादव ने बताया कि ठंड की शुरुआत ही तंबाकू में होने वाली बीमारी से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए की जा रही है। समय से इलाज न मिलने पर यह बीमारी हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता समय-समय पर बच्चों का विशेष ध्यान रखें और निमोनिया के प्रारंभिक संस्करण को पहचाननेकर डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर देवराज ने कहा कि नवजात शिशु से लेकर 14 साल तक के बच्चों के शरीर के तापमान में अगर थोड़ी सी भी गिरावट देखने को मिले तो तुरंत बालरोग विशेषज्ञ से सलाह लें।
खतरनाक क्यों है निमोनिया?
डॉक्टर देवराज यादव ने बताया कि मलेरिया के खतरनाक होने का एक कारण यह भी है कि यह बीमारी वायरस, बैक्टीरिया और फंगस रोग का कारण हो सकती है। इसलिए यह छोटे बच्चों में काफी जीवंत साबित हो सकता है। सीडीसी के मुताबिक, ओमिक्रॉन का वायरस SARS-CoV-2, इन्फ्लूएंजा और आरएसवी वायरस भी निमोनिया का कारण बन सकते हैं।
निमोनिया के कारण
⦁ जन्म के समय मलेरिया का टीका न लगाना।
⦁ रिचार्ज या फिर वायरस का संक्रमण
⦁ अगर बच्चे के जन्म से ही दिल में किसी प्रकार का विकार है तो इससे निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है।
निमोनिया के लक्षण
⦁ आराम से सांस लेने में आराम करने के साथ ही काफी तेज गति से सांस लेने में तकलीफ होती है।
⦁ भूख में कमी आना, इस दौरान दूध नहीं पीता या दूध पीने से परेशानी होती है.
⦁ जोड़े की पसल्स या छाती में दर्द होना.
⦁ बच्चों की आंख, कान और गले में भी दर्द होना।
⦁ अत्यधिक थकान और तेज़ ठंड के साथ बुखार आना।
⦁ कई बार जी म खाइचलाता है और उल्टियां भी हो सकती हैं.
निमोनिया का कारण निमोनिया बन सकता है
वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉक्टर देवराज यादव ने बताया कि कई बार माता-पिता के झगड़े के कारण बच्चों को निमोनिया की शिकायत हो जाती है। ऐसे में विशेष रूप से ध्यान दें कि बच्चे की रात में अजीब कपड़े पर न सोए। इसके अलावा ठंड से बचाव के लिए बच्चों के लिए गर्म कपड़े पहनना शुरू कर दिया गया है। हाथ-पैर और पैर को फैलाकर रखें, जिससे बच्चों को ठंड न लगे।
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पहले प्रकाशित : 19 दिसंबर, 2023, 19:41 IST
