अनूप/कोरबाः मार्गशीर्ष माह समाप्ति की ओर है। इस महीने में कुछ ही दिन बचे हैं. इसके बाद पौष माह की शुरुआत होगी। पौष माह में दान करना और पुण्य ग्रहण करना सभी के लिए शुभ माना गया है। सनातन हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस महीने में दसवां महीना होता है और भगवान सूर्य नारायण की पूजा करने का विधान है। इस पौष माह में धार्मिक महत्व को लेकर पं. पंडित चन्द्रा महाराज ने क्या कुछ बताया है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दशरथ नन्द महाराज ने बताया है कि पौष माह में भगवान सूर्य नारायण की पूजा का विशेष महत्व है। हर सुबह भगवान सूर्य नारायण को जल से अर्घ देने से सभी प्रकार के रोग और दोष समाप्त हो जाते हैं। साथ ही इस महीने में दान और पुण्य करना भी बेहद फलदायक माना जाता है। पंडित दशरथ नंद महाराज ने बताया कि पौष मास की संक्रांति इस बार 15 जनवरी को पड़ रही है।
अनाज का दान करना चाहिए
इस दिन प्रत्येक व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार सूर्य की धातु माने जाने वाली वस्तु एवं अनाज का दान करना चाहिए। इससे जिन व्यक्तियों को शनि का दोष होता है। उन पर शनि प्रश्न होते हैं और कृपा दृष्टि रत्न मिलते हैं। साथ ही ये भी है जरूरी बात कि इस महीने में भगवान सूर्य नारायण की पूजा भी जरूरी है. व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि और स्वास्थ्य लाभ की प्राप्ति होती है।
यहां जानें इसके सिद्धांत
उन्होंने बताया कि इस बार पौष 27 दिसंबर 2023 से शुरू हो रहा है. पौष मास की पूर्णिमा को चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में होता है। इसका नाम पौष रखा गया है। हिन्दू धर्म में सूर्य को प्रधान देवता माना गया है। ग्रंथों के अनुसार पौष मास में सूर्य के भाग स्वरूप की पूजा करनी चाहिए। शास्त्रों में ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान और वैराग्य को ही भगवान कहा गया है और इंद्रिय को ही भगवान माना गया है। ग्रंथों में बताया गया है कि पौष मास में भगवान भास्कर 11 हजार किराए के साथ तपकर आराम से राहत देते हैं। सिद्धांत है कि पौष माह में सूर्य पूजा से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और उम्र भी आधी होती है।
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पहले प्रकाशित : 19 दिसंबर, 2023, 14:58 IST
