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ब्रेन के लिए भी गुड रेलवे बन सकता है खराब, इस गंभीर बीमारी का बढ़ सकता है खतरा, तुरंत हो जाएं सावधान


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गुड कोलेस्ट्रॉल की भारी मात्रा से मस्तिष्क को गंभीर क्षति हो सकती है।
सामानों की खरीदारी तो लोगों को गुड चॉकलेट की मॉनिटरिंग करनी चाहिए।

एचडीएल डिमेंशिया जोखिम को कैसे बढ़ाता है: बाकी हमारे शरीर के लिए जरूरी है। आम तौर पर दो तरह का होता है. पहला गुड एलास्टिक्स लो डेनसिटी लिपोप्रोटीन (एचडीएल) और दूसरा बैड एलास्टिक्स लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन (एलडीएल) होता है। खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 100 मिलीग्राम/डीएल से कम हो, इसे नाममात्र माना जाता है। जबकि गुड़ की मात्रा 45 से 50 mg/dL तक नाममात्र है। गुड चॉकलेट 60 mg/dL तक हो, तब भी इसे अच्छा माना जाता है। लोग अक्सर मानते हैं कि गुड़ चॉकलेट अधिक मात्रा में होता है, चॉकलेट अच्छा होता है। हालाँकि यह लोगों की सैद्धांतिकी है।

यदि किसी व्यक्ति के शरीर में गुड एलिस्टेक्स की मात्रा एचडीएल 70 मिलीग्राम/डीएल या इससे अधिक हो जाए, तो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। लेंसेट रिजनल हेल्थ में पिछले महीने प्रकाशित एक अध्ययन में पता चला है कि शरीर में गुड तत्वों की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है, तो इससे दिमाग की गंभीर बीमारी डाइमेंशिया का खतरा 27 बच्चों तक बढ़ सकता है। यह ऑस्ट्रेलिया के सुपरमार्केट ने करीब 6 प्राचीन तक की थी। इसमें 18 हजार से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया है, इसमें छात्रों के डेटा के आधार पर नतीजे निकाले गए हैं।

जर्नल साइकोलॉजी में अक्टूबर 2023 में एक शोध प्रकाशित हुआ था, जिसमें पता चला कि गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा सामान्य से कम हो गई थी, तब भी डिमेंशिया का खतरा होता है। यदि गुड कोलेस्ट्रॉल सामान्य से अधिक है, तो भी लोगों को डाइमेंशिया रोग हो सकता है। ऐसे में गुड चॉकलेट पर भी नजर रखने की जरूरत है। आम तौर पर ज्यादातर लोग बैड ओल्ड्स को लेकर ही चिंतित रहते हैं और गुड क्लासेस पर ध्यान नहीं देते हैं। इससे उनका ब्रेन डैमेज हो सकता है. डाइमेंशिया एक खतरनाक बीमारी है, जिससे पीड़ित व्यक्ति हर छोटी-बड़ी बात भूल जाता है और इसका इलाज ठीक से नहीं किया जा सकता है।

जान लें बैड ऑनलाइन का गणित

नई दिल्ली सरराम गंगा हॉस्पिटल की सीनियर फ़िजीशियन डॉ. सोनिया रावत के अनुसार शरीर में एलडीएल यानी बैड लेवल लेवल 100 mg/dL से कम हो, तो सामान्य माना जाता है। यदि इसका स्तर 130 mg/dL या इससे अधिक हो तो इसे सीमा रेखा माना जाता है। 160 mg/dL या इससे अधिक मात्रा में खराब कोलेस्ट्रॉल हो जाए, तब इसे उच्च कोलेस्ट्रॉल माना जाता है। 190 mg/dL से अधिक हो जाए, तब इसे डेंजर जोन माना जाता है। इस कंडीशन में हार्ट और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

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