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मुस्लिम युवाओं ने हिंदू ‘भाई’ की चिता को दी मुखाग्नि, धार्मिक स्मारक दर्शन उड़मी भीड़


देश और दुनिया में धार्मिक आधार पर नफरत के बीच कुछ ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं जो एक उम्मीद बांधती है। एक ऐसी उम्मीद जिसमें हम भरोसा करते हैं कि एक दिन जरूर इंसान की जीत होगी। आज एक ऐसी ही कहानी की चर्चा करते हैं। जहां दो मुस्लिम लोगों ने अपने हिंदी ‘भाई’ की चिता को मुखाग्नि दी है। यह घटना देश के दक्षिणी राज्य केरल की है। इस घटना का दृश्य देखकर पूरी दुनिया का दिल दहल गया है।

यूक्रेन, केरल के पलक्कड़ जिले के विटानसेरी गांव में 52 साल के राजन का निधन हो गया। इसके बाद राजन की चिता को मुखाग्नि एलिमोन और मोहम्मद रिशान दी। इस मौके पर पूरे गांव के लोग इकट्ठे हुए। सभी लोग अपने धार्मिक बंधनों को राजन के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। चिता के साथ-साथ इलाके में भाईचारे और मुहब्बत की रोशनी फैलती जा रही थी।

इस पूरी कहानी की शुरुआत करीब चार दशक पहले हुई थी। गरीबी की मार झेल रहे करीब 10-12 साल का एक बच्चा राजन एक दिन उस वक्त गांव नन्नामुक्कू के पंचायत सदस्य रहे कम्बोलमपथ वालाप्पिलाल मोहम्मद से खाना खाने के लिए पैसे का आधा हिस्सा जाता है। मोहम्मद को लगता है कि राजन के पास रहने के लिए घर भी नहीं है। उसका कोई अपना नहीं है. फिर उन्होंने राजन को अपने घर में रख लिया। उनका पालन-पोषण बेटे-बेटियों ने किया। वह मोहम्मद परिवार का सदस्य बन गया।

केरल में मुस्लिम व्यक्ति और उसके भतीजे ने हिंदू भाई राजन का अंतिम संस्कार किया

शोकाकुल मोहम्मद परिवार में राजन का निधन।

राजन का निधन
कुछ दिन बाद मोहम्मद का निधन हो गया। इसके बावजूद राजन मोहम्मद के बेटे अलीमोन के साथ एक ही घर में रहे। बचपन में ही उनके माता-पिता को तलाक वाले राजन का भी इस दुनिया में कोई नहीं बचा था। उनका मूल जन्म स्थान विथानासेरी से नाता टूट गया था।

सोमवार को राजन को सीने में दर्द हुआ। फिर वे अस्पताल चले गये। लेकिन वे काम नहीं कर सके और उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद अलीमोन ने अपने भाई की अंतिम यात्रा के अनुसार अपनी धार्मिक धार्मिक यात्रा की योजना बनाई। राजन का शव घर लाया गया और उसे बरामद कर एक चटाई पर ले जाया गया। फिर दो स्थानीय हिंदू लोगों ए सुंदरन और मश्ट कुंजुनी के मार्गदर्शन में राजन का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार हिंदू परंपरा के अनुसार फूल, चंदन, चावल आदि हर चीज की व्यवस्था की गई। इस मौके पर आसपास के सभी लोगों ने राजन को अपनी श्रद्धांजलि दी।

फिर शव को श्मशान घाट ले जाया गया। राजन के शव को एलिमोन और उनके साथी मोहम्मद रिशान ने कंधा दिया। राजन की चिता को सजाया गया और उसे मुखाग्नि भी अलीमोन और रिशान ने दी। यह घटना पूरे इलाके में भाईचारे की मिसाल बन गई है।

टैग: केरल



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