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क्षेत्र में वृद्धि हुई है टीबी के रोगियों की समस्या, आधार से जानें कैसे रखें अपना प्रयास?


देसी आज़मी/मॉडल। बेहोश ने टीबी, दामा, बाबा और सांस्कृतिक साध्यार्थी के विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ गई है। विशेषज्ञ के अनुसार सांस की नली में नाक के साथ-साथ वायरल संक्रमण भी बढ़ता है। इससे जुड़े अध्ययन में सांसारिक प्रयोगशाला के लक्षण बढ़ जाते हैं। वहीं, सांसरिक संकट बढ़ने से लेकर टीबी के मरीज भी इलाज के लिए बार-बार अस्पताल आ रहे हैं। अगर ठंड से बचने के लिए सावधानी नहीं बरती जाती है, तो ठंडी हवा और फेफड़ों के फेफड़ों में घुलने वाले कणों से टीबी की बीमारी को और जटिल बना दिया जाता है। इससे टीबी के मरीजों को सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है।

उत्तराखंड के राजधानी अस्पताल में स्थित दून अस्पताल के सीएमएस और छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग अग्रवाल ने जानकारी देते हुए कहा कि समुद्र के मौसम में हवा के घनत्व हो जाते हैं और प्रदूषण के कण जम जाते हैं। टीबी के मरीज अगर इन फ्रोजन दोस्तों के संपर्क में आते हैं, तो उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इन सिद्धांतों से वृद्धि होने पर परेशानी होती है
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि पर्यावरण में धूम्रपान, धुआं और प्रदूषण के खतरे और युवाओं की मुश्किलें बढ़ती हैं। लोग इस मौसम में अगर बंद घरों में रहते हैं, तो परेशानी हो सकती है। भूकंप के मौसम में टीबी हो ऐसा जरूरी नहीं है क्योंकि यह अचानक नहीं होता है, धीरे-धीरे-धीरे-धीरे के लक्षण देखने को मिलते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि किसी परिवार में किसी व्यक्ति के साथ संबंध है, तो वह सही समय पर किसी भी सरकारी अस्पताल में बलगम की जांच कर सकता है और यदि पुष्टि हो जाती है, तो अपना स्तर शुरू कर सकता है। जो प्रोजेक्ट में बिल्कुल मुफ्त होता है.

मास्क का उपयोग करने का अर्थ
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि टी बी के मास्क का प्रयोग करना चाहिए और इसी के साथ ही अपने बलगम का डिस्पोजल सही से करना चाहिए। हम इन बातों को लेकर शोधार्थी को भी कहते हैं। सरकार तिब्बती बेरोजगार के लिए योजना भी चला रही है। किसी भी परिवार में यदि कोई व्यक्ति टीबी से ग्रसित है, तो उसके परिवार की सुरक्षा के लिए भी गोली दी जाती है।

सामान्य खांसी से कैसे अलग होती है टीबी की खांसी?
डॉ. अनुराग अग्रवाल ने जानकारी देते हुए कहा कि वैसे तो समुद्र के मौसम में ठंड के साथ खांसी सर्दी हो जाती है अगर आपको लंबे समय तक खांसी हो और खांसी के साथ बलगम या खून आए, तो यह होने के संकेत हो सकते हैं। टीबी के युवाओं को भूख कम लगती है. सुस्ती थकान और महसूस होती है. इसके अलावा सीने में दर्द महसूस होता है। उन्होंने बताया कि अगर इस तरह का कोई भी लक्षण नजर आए तो सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज मिल सकता है। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा भी कई टिड्डी दल के लिए योजनाएं जारी रखी जा रही हैं क्योंकि सरकार का साल 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य है।

टीबी के रोगी इन बातों का विशेष ध्यान
⦁ मास्क का प्रयोग करें
⦁स्वतंत्रता का ध्यान रखें.
⦁ सार्वजनिक स्थान में जाने से अशिक्षा।
⦁ सरलतम गर्म थर्मोबूट।
⦁ कूड़ा-कचरा, धुआं और प्रदूषण वाली जगहों पर न जाएं.
⦁ घर में नवजात शिशु हो तो बीसीजी टीकाएँ।
⦁ बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें.

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