उत्तर
दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने घटिया मरीजों की मौत के मामले में पूछताछ के बाद पूछताछ की।
नकली और गैर-मानक वाली दवाओं की आपूर्ति की गई।
इसमें कुछ जीवन रक्षक दवाएं भी शामिल हैं।
नई दिल्ली. दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना (एलजी वीके सक्सेना) ने सरकारी स्वामित्व में घटिया दवाओं (Sub-StandardMedicines) के पुराने मामले में वैज्ञानिक जांच (CBI Inquiry) का निष्कर्ष निकाला है। राज निवास के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मुख्य सचिव नरेश कुमार को दिल्ली सरकार के गुट में ‘घटिया’ डॉक्टरों की कथित खरीद और छात्रों के दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए। बताया गया है कि दिल्ली सरकार के विभागों और राजधानी में प्रमुख अल्पसंख्यकों में कथित तौर पर नकली और गैर-मानक वाली दवाओं की खरीद और आपूर्ति की गई, जिसमें कुछ जीवन रक्षक दवाएं भी शामिल हैं। इस पर पलटवार ने कहा कि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज (सौरभ भारद्वाज) ने स्वास्थ्य सचिव और अन्य अधिकारियों को निलंबित करने की मांग की है।
सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि उन्होंने दवाओं के लिए निर्देश दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि मुख्य सचिव नरेश कुमार ने एक नोट में इस अंक को जारी किया है उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने केस पर एसोसिएटेड आर्किटेक्चर की एक रिपोर्ट संलग्न की। विशेषज्ञ का कहना है कि दिल्ली सरकार के विशेषज्ञों की आपूर्ति की जा रही मानक की दवाओं के बाद दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के तहत डेयरी नियंत्रक ने आदर्श जांच के लिए विज्ञापन जारी किए थे। इसके बाद लैब रिपोर्ट को आवश्यक कार्रवाई के लिए एसआईटी विभाग को भेज दिया गया।
अधिकारियों का कहना है कि औषधियों के विशेषज्ञ तीन प्रमुख विशेषज्ञ हैं- मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान (IHBAS), लोक नायक अस्पताल और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल से लिए गए थे। एसआईटी विभाग ने कहा कि 10 प्रतिशत से अधिक आदर्श गुणवत्ता की जांच विफल हो गई है, इसलिए ऐसी दवाओं के वितरण पर तत्काल रोक लगा दी जानी चाहिए और दस्तावेजों का दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए। इसमें दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के तहत केंद्रीय खरीद एजेंसी के अलावा अन्य की भूमिका की भी जांच करने की मांग की गई है। पढ़ाई-लिखाई होगी.
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एलजी सक्सेना ने अपने नोट में लिखा है कि भारी बजट में खर्च करने से ये सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है और लोगों के जीवन को खतरे में डालने की क्षमता पैदा हो गई है। जबकि एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव एसबी दीपक के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि यह अधिकारी दवाओं की खरीद के लिए जिम्मेदार थे।
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पहले प्रकाशित : 24 दिसंबर, 2023, 02:35 IST
