उत्तर
मज़हबी चौक की पराठों की गली में सामी से देसी घी में ‘तले’ पर थे अंतिम संस्कार जा रहे हैं।
यहां क्लोज्ड बिजनेस में एक सौ साल से ज्यादा समय तक काम जारी रहता है।
दिल्ली का प्रसिद्ध भोजन: पुरानी दिल्ली में एक सड़क का नाम ‘भूतवाली’ गली है, लेकिन वहां भूत नहीं मिलता। ऐसे ही एक गली का नाम पीपल वाली है तो दूसरी का नाम नीम और जामिन वाली है। लेकिन जनसंख्या और अवैध निर्माण के कारण यह पेड़ लुप्त हो गया, लेकिन गलियाँ और उनका नाम अभी भी बाकी है। वैसे आज हम आपको ऐसी सड़क से स्ट्रॉबेरी बनवा रहे हैं, जिसका नाम भी चल रहा है और ‘काम’ भी जारी है। उस गली का नाम ‘पैराठे वाली गली’ है। यहां पर सौ साल से भी ज्यादा समय से पराठे अंत जा रहे हैं। इस मशहूर गली में पुराने जमाने से लेकर देसी घी तक ‘तले’ निकले हुए थे। पुराने जमाने में यहां पराठों की गिनी-चुनी वैरायटी ही होती थी, लेकिन अब जिसका स्वाद और रंगत के पराठे मिलते हैं, वह खाने वालों को हैरान कर देते हैं। इन पराठों का स्वाद देश के प्रधानमंत्री के अलावा नामी लोग भी उठा रहे हैं।
दिल्ली में कहां है पराठे वाली गली
जूनियर चौक में वैसे तो गली दरीबा, बल्लीरान, हवेली हैदर कुली के अलावा कई कतरे भी मशहूर हैं, जहां से लेकर अन्य प्रकार के व्यवसाय होते हैं। लेकिन यहां की स्ट्रीट परठे वाली का जलवा ही अलग है। आप इस भीड़भाड़ वाले बाजार से गुजरेंगे तो कई लोग इस गली का पता लगाकर आपको मिल जाएंगे। उदाहरण के लिए, आज हम भी आपको इस गली का परिचय करवाते हैं। मिर्ज़ा चौक के सीसगंज गुरुद्वारे से आगे बढ़ने पर बायीं ओर जाने वाली एक संकरी सी स्ट्रीट ही परथे वाली गली कहलाती है। पहले वहां एक मशहूर मूर्ति हुआ करती थी, अब चार-पांच में ही अपना एक मूर्ति स्थापित की गई और अब मेट्रो के आने के बाद ये और मशहूर हो गईं। कट्टर चौक की समझ रखने वाले लोगों का कहना है कि यहां के एक निवासी पंडित घासीराम ने वर्ष 1870 में इस गली में देसी पराठों की उड़ान शुरू की थी, जो स्थानीय लोगों और यहां के निवासियों का आगमन हुआ था। उसके बाद गली में बहुसंख्यक चला गया। पुराने दौर में यहां दो-तीन मिठाइयों के ही आलू-दाल आदि के परांठे मिलते थे और लोग इन्हें पसंद ही आनंद लेते थे, लेकिन अब पराठों की वैरायटी में जोरदार दरार आ गई है.
पराठों सेप्टिक सौंधी कच्चे माल की भूख
आप इस गली का दौरा करें, तलते हुए पराठों का धुआं और उनकी सौंधी-सौंधी सुगंध एकदम से आपकी भूख बढ़ाने वाली जादुई। इन नोटों के बाहर तांगे मैन्यु पर नजर दौड़ाएंगे तो आपको 25 से ज्यादा पराठों की वैरायटी के दर्शन हो जाएंगे। पराठों की कुछ वैरायटी तो आपको चमत्कृत कर सकती है। असल में यह टूटता हुआ है कि इस बाजार में अब देशी-विदेशी फिल्मों की तादात में भी लगातार टूटता जा रहा है। पराठों की वैरायटी आपको हैरान कर देगी, इनमें मेवा और कुरचन, मलाई और रबड़ी के मीठे परांठे तो अपना महक उड़ाते दिखेंगे, साथ ही पनीर, भिंडी, गाजर, मटर टमाटर, पुदीना, नींबू, मिर्च, आलू, दाल, गोभी, मिक्स , करेला, काजू और पापड़ के अलावा परत परांठा भी टलता रहेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन मानकों में तवे पर पराठा सेंका नहीं बल्कि कढ़ाही में देसी घी बनाया जाता है. इन पराठों का आकार आम पराठों से छोटा होता है। यानी बड़ी पूरी से कुछ बड़ा सा. वैसे ही तलता हुआ परांथा कुछ शांत पैदा होता है।
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पराठों के साथ सब्जी में क्या?
यहां बनी प्लेट (ऐसी प्लेट, जिसमें सब्जी आदि के लिए अलग-अलग तरह के मिश्रण होते हैं) में पराठे सर्व मिलते हैं। हमें लगता है कि पराठों से साथ मैक आदि ही काम करेगा, लेकिन मसला कुछ अलग है। इन त्योहारों में सीताफल, आलू के छोले और आलू मैथी के तीन टुकड़ों के अलावा केले और पुदीने की चटनी के साथ मिठाइयाँ बनाई जाती हैं। पराठों की कीमत 70 से 100 रुपये के आसपास बनी हुई है. छात्रों का कहना है कि उनके पराठों और किताबों में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल यहीं से शुरू नहीं हुआ है। तो आपको पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक बाजार बाजार चौक में खास डिश का आनंद मिलता है तो स्ट्रीट पराठे वाली में एक बार जरूर तशरीफ ले आइए।
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पहले प्रकाशित : 24 दिसंबर, 2023, 07:31 IST
