आखिरी बड़कुल/दमोह: ग्रामीण क्षेत्र में पाया जाने वाला बहेड़ा का पेड़ आयुर्वेद में बेहद वाला माना जाता है। इसके फल के इस्तेमाल से हाथ-पैर की जलन और सूजन ख़त्म हो जाती है। इतना ही नहीं, इस बहेड़े के बीज को पानी के साथ पीसकर लगाने से भी फायदा होता है। इसके केश का लेप बचे बालों की नस्ल पर उपयोग से असमय बालों का सफेद होना रुका रहता है।
ऐसे देखें त्रिफला व्यंजन
ग्रामीण क्षेत्र के जंगलों में पाए जाने वाले ये जड़ी-बूटी, बहेड़ा और हरड़ औषधीय औषधि को आयुर्वेद की जान माना जाता है। त्रिफला के बीज बनाने के लिए सबसे पहले 3-4 दिन तक तीला अनाज, बहेड़ा, हरड़ इन तीनों को धूप में रखा जाता है। . जब त्रिमूर्ति वस्तुएं अच्छे से सुखी हो जाती हैं तब सभी को एक-एक कर पीसकर उनकी आकृतियां बनाई जाती हैं, जिनका प्रयोग कई प्रकार से किया जा सकता है।
ये समस्याएँ एकमात्र दूर
शरीर में आने वाली सूजन से लेकर हाथ-पैर में होने वाली जलन तक को दूर करने में यह औषधीय फल के बीज का मिश्रण औषधि है। संस्कृत भाषा में इस बहेड़ा को करशफल सीड रूमा व विभीतकी के नाम से जाना जाता है। यह पतझड़ वाला वृक्ष होता है, औसत माप 30 मीटर होता है। इसके पत्ते पत्ते और 10-12 सेमी लंबे होते हैं। इसके बीज स्वाद में स्वादिष्ट होते हैं।
रामबाण के लिए बाल
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. दीप्ति नामदेव ने बताया कि हार्मोन्स स्टॉक में भी बेहेड़ा का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा असमय रूप में बाल सफेद हो रहे हैं तो उसे भी काला करने में यह फल सहायक है। बालों में रूसी और फ़्रैंच बालों वाली बिल्लियों के लेप में काफी जगहें हैं।
अस्वीकरण: इस खबर में दी गई औषधि/औषधि की सलाह हमारे वैज्ञानिकों द्वारा दी गई चर्चा के आधार पर है। यह सामान्य जानकारी है, कोई व्यक्तिगत सलाह नहीं। हर व्यक्ति की आवश्यकताएं अलग-अलग हैं, इसलिए डॉक्टरों से सलाह के बाद ही, किसी भी चीज का उपयोग करें। कृपया ध्यान दें, लोकल-18 की टीम का किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए कोई उत्तरदायित्व नहीं होगा।
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पहले प्रकाशित : 30 दिसंबर, 2023, 16:25 IST
