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हसदेव अरण्य को बचाने के लिए हसदेव के लोगों ने राष्ट्रपति का नाम दिया, सांत्वना विरोध किया


अनूप/कोरबाः
हसदेव अरण्य के पर्यावरण को बचाने के लिए 2 जनवरी को कोरबा में आज मानव श्रृंखला का आयोजन किया गया। सुबह 11 बजे से शुरू हुई इस समारोह में स्वच्छ पर्यावरण से जुड़ी चर्चा पर बातचीत की गई। वहीं साथी कोरबा डेमोक्रेट ने इस दौरान राष्ट्रपति के नाम से एक निषेध दिया है। यह आयोजन कोरबा के पर्यावरण संरक्षकों के सामने आया, जिसमें जिले के पर्यावरण संरक्षकों ने भाग लिया।

तीन पेड़ों की होलिका है कटिंग
पर्यावरण प्रेमी अब्दुल नफीस खान के कोयला खदानों के लिए कट रहे छत्तीसगढ़ के जंगल हसदेव अरण्य को रोकने की मांग की गई। अब जिले के पर्यावरण संरक्षकों द्वारा 2 जनवरी को हसदेव के जंगल को बचाने की मांग को लेकर कोरबा कलेक्टर कार्यालय के समक्ष मानव श्रृंखला का विरोध किया गया। साथ ही इन संरक्षकों ने जिलाधीश को राष्ट्रपति के नाम की अनुमति दी। अब्दुल नफीस खान ने बताया कि परसा ईस्ट केते बासेन खदान के लिए कुल 1136 हेक्टेयर जंगल कच्चा है। इसमें से 137 हेक्टेयर के पेड़ काटे जा रहे हैं। साथ ही परसा कोल ब्लॉक के 1267 हेक्टेयर यानि करीब 9 लाख के पेड़ काटे जायेंगे। इसी तरह के आश्रम और वनस्पति के साथ हसदेव नदी का केचमेंट भी प्रभावित होगा।

क्या प्रभाव पड़ेगा?
हसदेव के जंगल से आने वाली पीढ़ी को इसके लिए आवेदन करना पड़ सकता है और मानव हाथी संघर्ष से जनहानी की भी स्थिति बन सकती है। हसदेव अरण्य को बचाने के लिए प्रदेश सहित पूरे भारत और विश्व समुदाय में प्राकृतिक प्रेमी और पर्यावरण सरंक्षण प्रहरियों के सेवा हसदेव के तहत अपनी भावनाओं को व्यक्त किया जा रहा है। प्रदेश का हर नागरिक यही चाहता है कि हसेदव अरण्य किसी भी हाल में ही समाप्त हो। कोरबा जिले के निवासी भी हसदेव अरण्य को बेहद परेशान करने वाले हैं।

ख़तरनाक स्थिति 18 वनस्पतियों का अनुभव
मृत अब्दुल नफीस खान का कहना है कि हसदेव अरण्य छत्तीसगढ़ के उत्तरी कोरबा, दक्षिणी सरगुजा और सूरजपुर जिले के बीच में स्थित है। इस जंगल में लगभग 1,70,000 हेक्टेयर भूमि पर अनेक प्रकार के जीव निवास करते हैं। वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की साल 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, हसदेव अरण्य में गोंड, लोहार और ओरांव जैज जनेजुब गुट के 10 हजार लोगों का बसेरा है। यहां 82 प्रकार की पक्षी, दुर्लभ प्रजाति की टिट्लियां और 167 प्रकार की वनस्पतियां पाई पाई जाती हैं। इनमें से 18 वनस्पतियाँ लुप्त हो चुकी कहानियों के अवशेष पर हैं। इसी क्षेत्र में हसदेव नदी भी बहती है। हसदेव जंगल इस नदी के जलग्रहण क्षेत्र में है।

टैग: छत्तीसगढ़ समाचार, जंगल, कोरबा खबर, स्थानीय18



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